दुमका।
केंद्र सरकार की घोषित आय योजना के तहत अघोषित आय को घोषित नहीं करने के सूचना पर धनबाद के प्रधान आयकर आयुक्त के द्वारा गठित किये गये टीम ने मंगलवार की दोपहर दुमका के तीन चिकित्सकों- डा. संजय लाल दास, डा. गीतम चैरसिया और डा. अरविन्द कुमार के क्लीनिक और घर में छापेमारी की है। इन तीनों चिकित्सकों के बारे में विभाग को विभिन्न स्रोतों से ऐसी सूचना मिली है कि पिछले एक दशक में तीनों ने काफी संपत्ति अर्जित की है और उसे घोषित नहीं किया। 2005-06 तक डा. अरविन्द कुमार और डा. गीतम चैरसिया किराये के मकान में क्लीनिक चलाया करते थे। कुछ साल पूर्व दोनों ने बाबूपाड़ा में खुद का क्लीनिक बना लिया है। जिस संपत्ति को घोषित नहीं किया गया हो और उसका निर्धारित टैक्स जमा नहीं किया गया हो, आयकर विभाग उस संपत्ति को काला धन मानती है। केन्द्र सरकार ने इस वर्ष चार माह का समय देकर काला धन को बाहर निकालने का अभियान चलाया है जिसके लिए आयकर विभाग के ओर से दुमका में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया था पर इसका असर नहीं हुआ। मंगलवार को देवघर से सहायक आयकर आयुक्त बीके सिंह के नेतृत्व में आयी 12 सदस्यीय टीम ने शहर के बाबूपाड़ा में चल रहे तीन चिकित्सकों के प्राईवेट क्लीनिक का सर्वे किया। इस दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई। आयकर विभाग की टीम शाम के लगभग 3 बजे नारायण आर्थो नाम से निजी क्लीनिक चला रहे हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. संजय लाल दास के क्लीनिक में पहुंची। दूसरी टीम बाबूपाड़ा में स्थित संजीवनी मेटरनिटी एंड सर्जिकल हेल्थ सेंटर चलाने वाले सर्जन डा. अरविंद कुमार और उनकी पत्नी स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. श्रीमती गीतम चैरसिया के क्लीनिक में पहुंची। दोनों जगह एक साथ आय के सर्वे का काम शुरू किया गया। आयकर जांच का काम समाचार लिखे जाने तक जारी था। सहायक आयकर आयुक्त ने बताया कि धनबाद से प्रधान आयकर आयुक्त ललित मोहन पांडे और देवघर के अपर आयुक्त सौमित्य दास गुप्ता के निर्देश पर यह सर्वे किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की योजना के तहत दुमका में कार्यशाला आयोजित कर जानकारी देने के बावजूद यहां के लोगों ने अपनी आय घोषित करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। जांच में यह पता करने का प्रयास किया जाएगा कि तीनों डाक्टरों ने अपनी आय और संपत्ति घोषित की है या नहीं। यदि संपत्ति घोषित की है तो कितनी की है। कहीं इन चिकित्सकों के पास ऐसी संपत्ति तो नहीं है जिसके लिए टैक्स नहीं दिया गया है। उन्होंने बताया कि अघोषित आय एक टाइम बम की तरह है। केंद्र सरकार ने एक जून 2016 से 30 सितंबर 2016 तक संपूर्ण देश में केंद्र सरकार की आय घोषणा योजना 2016 (आईडीएस या इनकम डिक्लेरेशन स्कीम) चलाई हुई है। इसके तहत जो व्यक्ति अपने काला धन को श्वेत धन में परिवर्तित करना चाहते हैं वे सभी 30 सितंबर तक अपनी आय व संपत्ति का संपूर्ण ब्यौरा आयकर विभाग को बता दें। जो व्यक्ति 30 सितंबर तक अपनी आय और संपत्ति का ब्यौरा नहीं देंगे उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।








