संताल विद्रोह 1855-1856 के विस्मृत नायकों पर शोध आलेख

झारखंड देखो/प्रतिनिधि:फरक्का(मुर्शिदाबाद) इंडियन काउन्सिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च, नई दिल्ली (आइ.सी.एस.एस.आर, नई दिल्ली) द्वारा सम्पोषित और सेंटर फोर स्टडी ऑफ सोशल एक्लुजन एंड इनक्लुजन पोलिसी,फैकल्टी ऑफ सोशल साइंसेस,बनारस हिन्दू विवि,वाराणसी (उत्तर प्रदेश) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार 26–27 मार्च 2002 में एकेडमिक फोरम (दुमका,झारखंड) और स्टडी एंड रिसर्च सेंटर (रामपुरहाट, पश्चिम बंगाल)) के दो […]

बाबूलाल मुर्मू ‘आदिवासी’ : देवनागरी लिपि के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार तक ठुकरा दिया

बाबूलाल मुर्मू आदिवासी : देवनागरी लिपि के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार तक ठुकरा दिया, उनकी 70वें जयंती पर विशेष जन्म : 12 जनवरी, 1939 निधन : 4 फरवरी, 2009 लेखक :डॉ. आर.के नीरद झारखण्ड देखो : बाबूलाल मुर्मू ‘आदिवासी’ संताली के ऐसे साहित्यकार थे, जिन्होंने संताली भाषा, साहित्य और संस्कृति को समृद्ध करने के एकमात्र […]

संताली भाषा और साहित्य के यशस्वी साहित्यकार थे बाबूलाल मुर्मू “आदिवासी”- डॉ दिनेश नारायण वर्मा

झारखंड देखो डेस्क : इतिहासकार डॉ दिनेश नारायण वर्मा ने संताली के यशस्वी साहित्यकार बाबूलाल मुर्मू “आदिवासी” की जन्म तिथि 12 जनवरी(1939) के अवसर पर उनकी बेजोड़ साहित्य साधना की विवेचना की और इसकी अनुपम खूबियों को बताते हुए कहा कि उन्होंने लगभग 45 वर्षों तक संताली भाषा और साहित्य को समृद्ध किया।इतिहासकार वर्मा के […]

निर्दयता की हद को लांघती मनोविकारी प्रवृत्तियां

लेखक:डॉ विनोद कुमार शर्मा असिस्टेंट प्रोफेसर निदेशक मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्र, मनोविज्ञान विभाग, सिदो कान्हू मुर्मू विवि, दुमका। झारखण्ड देखो डेस्क : यह बात कहना जितना ही दुःखद व निंदनीय है उससे कहीं ज्यादा चिंतनीय विषय भी है कि वर्त्तमान समाज में घटती अनैतिक व अमानवीय घटनाएं सामाजिक मान-मर्यादाओं की सारी सीमाएं लांघ रही है। […]

वर्चुअल’ रहे रिश्ते, सोशल डिस्टेंसिंग के भी है फायदे

लेखक :डॉ विनोद कुमार शर्मा असिस्टेंट प्रोफेसर निदेशक मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्र, मनोविज्ञान विभाग, एस पी कॉलेज, दुमका। झारखण्ड देखो डेस्क :जीवन अनमोल है। मूल्यवान है। यह ईश्वर का दिया हुआ वरदान है। फिर जीवन के साथ अभद्र व्यवहार क्यों? इतनी व्यवहारिकता क्यो? जरूरत है जीवन उद्देश्य को भी समझने की जो पशुओं के जैसा […]

संताल विद्रोह 1855-1856 सम्बन्धी साम्राज्यवादी दस्तावेजों की समीक्षात्मक विवेचना की आवश्यकता

डॉ दिनेश नारायण वर्मा ,इतिहासकार झारखण्ड देखो डेस्क :संताल विद्रोह 1855-1856 के विभिन्न पहलुओं पर अधिकारिक रूप से लेखन कार्य करने के लिए प्रख्यात इतिहासकार डा.दिनेश नारायण वर्मा ने कहा कि साम्राज्यवादी दस्तावेजों में संताल विद्रोह सम्बन्धी सभी वर्णन ऐतिहासिक और प्रामाणिक नहीं हैं। इन दस्तावेजों की समीक्षात्मक विवेचना की आवश्यकता बताते हुए प्रोफेसर वर्मा […]

संताल विद्रोह : 1855-1856 विश्व के सबसे बड़े साम्राज्यवाद को सबसे बड़ी चुनौती  एक समीक्षात्मक विवेचना

डा.दिनेश नारायण वर्मा,इतिहासकार   झारखण्ड देखो डेस्क :शोषण,दमन और उत्पीड़न के गर्भ से प्रस्फुटित संताल विद्रोह 1855-1856 विश्व के सबसे बड़े साम्राज्यवाद को सबसे बड़ी चुनौती थी। 19वीं शताब्दी में किसी भी देश में विदेशी शासन के खिलाफ संताल विद्रोह के पूर्व इतना बड़ा सशक्त,संगठित और सशस्त्र जन आन्दोलन नहीं हुआ था। इसलिए  विश्व के कई […]

कतिपय लोकप्रियता में मीडिया की बदलती जीवन शैली

प्रेस स्वतंत्रता दिवस: 3 मई लेखक :डॉ विनोद कुमार शर्मा असिस्टेंट प्रोफेसर, निदेशक मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्र, मनोविज्ञान विभाग, एस पी कॉलेज, दुमका। झारखण्ड देखो डेस्क : मीडिया जिसका कि लिटेरल मीनिंग उस संचार माध्यम से होता है जिससे देश, विदेश , प्रदेश व आसपास में घटी घटनाओं की खबर लोगो तक निष्पक्ष रूप से […]

भ्रष्टाचार कोरोना जिंदा है, ग़ालिब हम शर्मिंदा है

लेखक : डॉ विनोद कुमार शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, निदेशक, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्र, मनोविज्ञान विभाग, एस पी कॉलेज, दुमका। झारखण्ड देखो :विश्व संक्रमित कोरोना वायरस ने लोगो की नींद उड़ा दी है। चीन में शुरू यह वायरस देखते-देखते लाखों लोगों को अपने मौत के चपेट में ले लिया। कितनों को संभलने का मौका तक नही […]

प्रेमजाल में फँसने को आतुर युवा

वेलेंटाइन डे: 14 फरवरी लेखक :-डॉ विनोद कुमार शर्मा असिस्टेंट प्रोफेसर, निदेशक, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्र, मनोविज्ञान विभाग, एस पी कॉलेज, दुमका। ‘वेलेंटाइन डे’अर्थात ” प्रेम दिवस” दिल मे उमड़े रागात्मक भावनाओ को अभिव्यक्त करने का माध्यम माना जाता है । यह नदी में उफनती तेज धारा की तरह है जिसमें डूबने वाला हर दिल […]