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नोटबंदी से हलाक हुए मेहनतकश मजदूर-श्यामल किशोर सिंह

दुमका।

पिछले 08 नवम्बर 2016 को पीएम नरेन्द्र मोदी ने पाँच सौ व एक हजार के नोटों को अवैध करार देते हुए काले धन पर वार किया था और उन्होनें कहा था कि इससे जाली करेन्सी की छपाई, आतंकियों की फंडिंग (टेरर फंडिंग) व कालाधान को जमाखोरों को बढ़ावा मिलता है। पीएम ने उपरोक्त नोटों की बंदी कर दो हजार रुपये के नये नोट को चलन प्रारंभ किया किन्तु दो हजार के नये नोटों की जाली करेंसी भी पकड़ में आयी है। इतना ही नहीं दो हजार की जाली करेंसी के छापेखाने भी पकड़ में आए है, और आतंकवादी गतिविधियाँ भी चल रही है। इससे साफ जाहिर होता है कि बिना रिजर्व बैंक की सहमति के पीएम ने ऐसा कदम उठाया जिससे दिहाड़ी मजदूर, किसान, महिलाएँ, व वरिष्ठ नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है। जिला काॅग्रेस कार्यालय में पत्रकार सम्मेलन आयोजित कर जिलाध्यक्ष श्यामल किशोर सिंह ने अपनी भड़ास निकाली है। जिला काॅग्रेस कमिटी के युवा अध्यक्ष संदीप सिंह, अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष भगवान दास मुर्मू, किसान प्रकोष्ठ के धनीराम बास्की, पूर्व प्रत्याशी मार्शल मुर्मू, बारिस मुर्मू, नोबेल हांसदा की मौजूदगी में जिलाध्यक्ष श्री सिंह ने कहा कि उपरोक्त मुद्दे के आलोक में राष्ट्रीय स्तर पर काॅग्रेस आंदोलनात्मक रुख अख्तियार कर चुकी है। जिलास्तर पर प्रथम चरण में पार्टी कार्यकर्ताओं के माध्यम से आम नागरिकों के बीच पीएम नरेन्द्र मोदी के नोटबंदी के खिलाफ लोगों को जागरुक किया जाऐगा। 05 जनवरी को प्रत्येक जिले में समाहरणालय का घेराव किया जाऐगा। 08 जनवरी को काॅग्रेस पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं द्वारा टीन बाजार चोक पर थाली बजाकर इसका विरोध तथा प्रदर्शन किया जाऐगा। श्री सिंह ने कहा नोटबंदी के बाद 50 दिनो के अन्दर झारखण्ड के अलग-अलग जिलों में कई लोगों की मृत्यु हुई है। एसबीआई शाखा मोहम्मदगंज में कतार में खड़े रामबांध (शिवपुर पंचायत) कांडी, पलामू के रामचन्द्र पासवान की मौत हो गई। ग्रामीण बैंक एमजीएम, जमशेदपुर में पैसा लेने गई बीएड की छात्रा बिन्दु सिंह, गोड्डा के दीघा में रशीदा खातुन व सिसई गुमला में बीएन ठाकुर की विधवा की मौत एटीएम लाईन में खड़ा हो गई। उन्होने कहा काॅरपोरेट घरानों द्वारा बैंकों से भारी मात्रा में लिये कर्ज स्वरुप नोटों की अदायगी न करने की स्थिति में और देश से माल्या सरीखे लोगों के पलायन से वित्तिय घाटे को पाटने के लिये मोदी सरकार ने नोटबंदी की नई स्कीम चलाकर 99 प्रतिशत मेहनतकश मजदूरों, ईमानदार नागरिकों के मेहनत के पैसे बैंकों में जमा करवा कर अपनी गलतियों से बचने का प्रयास किया। नोटबंदी के नियमों में लगातार फेरबदल करते हुए मोदी सरकार के अकुशल प्रबंधन से पूरा देश मर्माहत है। आरबीआई गर्वनर उर्जित पटेल ने नोटबंदी के बाद विकास दर के अनुमान को कम कर दिया। पहले 7. 6 प्रतिशत विकास दर की बात कही गई थी जो नोटबंदी के बाद 7. 1 कर दिया गया। श्री सिंह ने कहा देश की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट लाकर मोदी सरकार जहाँ एक ओर सुकुन महसूस कर रही है वहीं दूसरी ओर इस सरकार को अब ज्ञात हो चुका है कि सभी कैश काला धन नहीं है। नोटबंदी न हुआ होता तो देश अमन-चैन की सांस ले रहा होता।

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