भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रवीण प्रभाकर ने कहा है कि रघुवर दास के रुप
में राज्य में एक मजदूर मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचा है, यह झाविमो
अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को पच नहीं रहा है। बाबूलाल मरांडी ने
मुख्यमंत्री बनने पर झारखंड को बेपटरी कर दिया था, जिसका परिणाम राज्य आज
तक भुगत रहा है। विधानसभा चुनाव में दो दो सीटों पर जनता द्वारा खारिज़
किए जाने के बाद बाबूलाल मरांडी फिर से राज्य में बाहरी-भीतरी की बात कर
जनता को बांटने की साजिश करने में जुट गए हैं।
श्री प्रभाकर ने कहा कि मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मात्र दो वर्षों में
आदिवासी-मूलवासी के हित में कई व्यापक निर्णय लिये और राज्य के विकास की
गाड़ी को पटरी पर ला दिया है। राज्य के विकास को बाधित करने वाले जितने भी
मुद्दे थे, उन सभी मुद्दों पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अल्प समय में
निर्णय लेकर सबों का मुंह बंद कर दिया। राज्य में स्थानीयता को पहली बार
परिभाषित किया गया, जिससे राज्य के लाखो युवाओं के लिए सरकारी नोकरियों
का रास्ता खुल गया। सीएनटी-एसपीटी एक्ट के सरलीकरण से मूलवासी-आदिवासी
जनता को अपनी भूमि पर मालिकाना हक बरक़रार रखते हुए स्वरोजगार करने का
अधिकार मिल गया।
श्री प्रभाकर ने कहा कि बाबूलाल मरांडी बताएं कि मुख्यमंत्री रहते
उन्होंने आदिवासी-मूलवासी जनता के हितों के लिए कोई कदम क्यों नहीं
उठाया। वह चिंतन-मंथन करें कि उन्हें जनता ने दो-दो सीटों पर ख़ारिज क्यों
कर दिया। बाबूलाल मरांडी अब सिर्फ अखबारी नेता बनकर रह गए हैं। वह राज्य
के विकास के लिए सकारात्मक चिंतन छोड़ विकास विरोधी विचारधारा पर चल पड़े
हैं, इसे जनता अच्छी तरह समझ रही है।
बाबूलाल मरांडी अब सिर्फ अखबारी नेता बनकर रह गए-प्रवीण प्रभाकर








