भावुक हुए रामनाथ कोविंद.. याद आई टपकती छत, गरीबी में गुजारे दिन
नई दिल्ली। देश का 14 वें राष्ट्रपति चुने जाने के बाद रामनाथ कोविंद की आंखों में बचपन की तस्वीरें तैरने लगीं। गरीबी के वो दिन याद आ गए जब उन्हें और उनके भाई-बहन को बारिश के दिनों में सिर छिपाने के लिए जगह तलाशनी पड़ती थी। राष्ट्रपति चुने जाने के बाद भावुक हुए रामनाथ कोविंद ने क्या-क्या कहा जानिए उन्हीं की जुबानी…
‘आज दिल्ली में सुबह से बारिश हो रही है। बारिश का यह मौसम मुझे बचपन के उन दिनों की याद दिलाता है जब मैं अपने पैतृक गांव में रहा करता था। घर कच्चा था, मिट्टी की दीवारे थीं, तेज बारिश के समय फूस की बनी छत पानी रोक नहीं पाती थी। हम सब भाई-बहन कमरे की दीवार के सहारे खड़े होकर इंतजार करते थे कि बारिश कब समाप्त हो।’
‘आज देश में ऐसे कितने ही रामनाथ कोविंद होंगे.. जो इस समय बारिश में भीग रहे होंगे.. कहीं खेती कर रहे होंगे.. कहीं मजदूरी कर रहे होंगे। शाम को भोजन मिल जाए इसके लिए पसीना बहा रहे होंगे। आज मुझे उनसे कहना है कि परौंख गांव का रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति भवन में उन्हीं का प्रतिनिधि बनकर जा रहा है।’









