Home / News / जनजाति समाज के मंथन के लिए जुटे जनजातीय छात्र

जनजाति समाज के मंथन के लिए जुटे जनजातीय छात्र

दूसरे जनजातीय छात्र जुटान झंडोत्तोलन के साथ हुआ प्रारंभ

दुमका :अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के दूसरे तीन दिवसीय जनजातीय छात्र जुटान दुमका में ध्वजारोहण एवं प्रदर्शनी उद्घाटन के साथ जुटान कार्यक्रम का हुआ आरंभ।इस मूसलधार बारिश में संपूर्ण झारखंड से 1878 छात्रों ने संथाल परगना वीर सिदो कान्हू चांद भैरव की धरती पर जनजाति समाज के मंथन के लिए जुटे।
जुटान के मुख्य केंद्र फूलों जानों प्रदर्शनी कक्ष का उद्घाटन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री प्रफुल्ल अकांत एवं अखिल भारतीय जनजाति प्रमुख जे राममोहन ने किया। इस दौरान प्रदर्शनी विभाग के प्रमुख प्रदर्शनी कक्ष स्थित झारखंड के ऐतिहासिक सांस्कृतिक महापुरुषों की गाथा से परिचित कराने का कार्य प्रदर्शनी मे लगे कार्यकर्ताओं ने किया।
इस जुटान मे मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात चिंतक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील आंबेकर , विशिष्ट अतिथि
देवव्रत पाहन क्षेत्र संघचालक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अतिथि संजय सिंह पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, प्रो नाथू गाड़ी प्रदेश अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह प्रदेश मंत्री सुश्री नीलम बड़ाईक प्रांत जनजातीय सह कार्य प्रमुख ने दीप प्रज्वलित कर एवं माता सरस्वती स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण कर जुटान का उद्घाटन किया।मंच संचालन प्रदेश महामंत्री देवेंद्र लाल उरांव व धन्यवाद ज्ञापन रौशन कुमार सिंह जी के द्वारा किया गया।इसके बाद सभी मंचस्थ अतिथियों को पुष्पगुच्छ, स्मृति चिन्ह वा शॉल देकर सम्मानित किया गया ।इसके बाद प्रदेशअध्यक्ष प्रो. नाथु गाड़ी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए स्वागत भाषण दिया।विशिष्ट अतिथि देवव्रत पाहन ने कहा कि हमारे एवं जनजातीय क्षेत्रों का त्यौहार हमारा धरोहर है। हमें इसे बचाने का आवश्यकता है।हमें शर्म नहीं आनी चाहिए कि हमारी भाषा क्या है हमारा वेश क्या है। हमें अपनी संस्कृति एवं जीवन पद्धति के अनुसार चलनी चाहिए। जनजातीय समाज ने प्रकृति के मरना एवं जीना सिखाता है। जुटान के मुख्य अतिथि सुनील आंबेकर ने कहा कि जुटान में आने वाले लोगों बारिश एवं तूफान से डरने वाले नहीं हैं। उससे भी आगे बढ़कर जो मन में ठान लिया है उसके लिए तैयार हैं।जनजातियों की जीवंत समृद्ध परंपरा, उनकी आकांक्षाओं को सम्मिलित करने से होगा समाज का विकास। संरक्षण के नाम पर अलग थलग दायरे में न बांधे जनजातीय समुदायों को आज जब हम पर्यावरण सम्मत विकास प्रणाली को खोज रहे हैं – ध्यान से देखें तो प्रकृति और उसके रुपों के प्रति आदर का संस्कार हर स्थानीय समाज में पाया जाता है -पूजा पद्धति भिन्न हो सकती है परंतु प्रकृति और पर्यावरण के प्रति आदर का भाव हर जनजातीय समुदाय में समान है। विभिन्नताओं में एकता का इससे उत्कृष्ट उदाहरण नहीं मिलेगाअपने पर्यावरण के प्रदूषण से चिंतित हैं – जंगलों और जल स्रोतों के नष्ट होने से चिंतित हैं, पर्यावरण-संरक्षण की जनजातीय तकनीकें, प्रकृति के प्रति उनके संस्कार, हमें बहुत कुछ सिखा सकते हैं। विद्यार्थी परिषद हमेशा विद्यार्थियों की समस्या के लिए लड़ता रहा है और जनजातीय समाज के शिक्षा के क्षेत्र में उनकी भागीदारी उनके हक के लिए हमेशा लड़ता रहेगा।
इस जुटान में जनजातीय समाज के शैक्षणिक स्थिति एवं जनजातीय समाज की वर्तमान परिदृश्य पर प्रस्ताव लाए गए हैं।
इस मौके पर क्षेत्रीय संगठन मंत्री निखिल रंजन प्रदेश संगठन मंत्री याज्ञवल्क्य शुक्ल , डॉ पंकज कुमार श्रवण कुमार सिंह, जुटान के संयोजक मनोज सोरेन सहित व्यवस्था में लगे दुमका के सभी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *