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तेज हवा में धाराशायी हुआ दुमका के शिवपहाड़ का पुराना वटवृक्ष


प्रकृति के मिजाज को समझने की आवश्यकता-पंडित अनूप कुमार वाजपेयी

झारखण्ड की उपराजधानी दुमका स्थित धार्मिक लोक आस्था का एक पुराना बरगदवृक्ष आज दोपहर बाद कुछ क्षणों की तेज हवा में धाराशायी हो गया हालाँकि इससे जान-माल की कोई क्षति नहीं हुई मगर सोशल मीडिया में आई प्रतिक्रियाओं के अनुसार इसके प्रति धार्मिक आस्था रखने वाले भक्तों को दु:ख अवश्य हुआ। विशेषकर प्रतिवर्ष वटसावित्री व्रत के दिन (ज्येष्ठ अमावस्या) को महिलाएँ इस वृक्ष को पूजती थीं। अन्यदिनों में भक्त इसमें जल डालते, पुष्प अर्पित करते थे एवं इसके नीचे दीप प्रज्जवलित करते थे। उल्लेखनीय है कि शिवपहाड़ दुमका का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।

प्रकृति पर पैनी दृष्टि रखनेवाले पुरातत्वविद पंडित अनूप कुमार वाजपेयी बताते हैं कि “पिछले कुछ सालों से संताल परगना प्रमंडल में प्रकृति के बदले हुए मिजाज को समझने की आवश्यकता है। 31 मई 2011 ईसवी को स्थानीय स्तर पर हुए हवा के दवाब से दुमका में क्षण भर के लिये उठे एक तूफान ने देखते ही देखते नये-पुराने पेड़ों को धाराशायी कर दिया था। जबरदस्त तबाही हुई थी। तब से तूफान के कारण पहाड़ी भागों में हर साल कहीं न कहीं पेड़ों का धाराशायी होना बात है जैसा कि आज विशेषकर पाकुड़ क्षेत्र में भी हुआ। जहाँ तक शिवपहाड़ के बरगद वृक्ष की बात है उसे अपनी जड़ों को फैलाने और सुदृढ़ करने का उपाय नहीं मिला। अब तो ऐसा हो रहा कि तूफान से संताल परगना के पहाड़ी भाग अधिक प्रभावित होते हैं चूँकि पेड़ों के साथ पहाड़ घट रहे हैं और पहाड़, तूफानों से रक्षा करते हैं।” शिवपहाड़ के शिवमंदिर की प्राचीनता के बारे में सवाल पर उन्होंने कहा कि “मंदिर का एक शिलालेख (जो अब नहीं है) के अनुसार इस मंदिर की पहली बार मरम्मति 1889 ई0 के आसपास हुई थी। शिवपहाड़ एक पुराना धर्मस्थल है। “

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