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एक मुलाक़ात डॉ अराधना कुमारी के साथ ……

हमेशा जीत की कोशिश में हार को भी सम्मान करें -डॉ अराधना कुमारी

झारखण्ड देखो डेस्क :झारखण्ड के लातेहार से डॉ अराधना कुमारी को सामाजिक कार्य के लिए कई संस्था ने समाज सेविका के रूप में अंतराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय पुरस्कार‎ से सम्मानित किया है .यंहा बता दे की लातेहार की रहने वाली आराधना ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद सामजिक कार्यो में जुड़ गयी .अपने सामाजिक कार्यो के कारण ये पूरे विश्व में अपने नाम के परचम लहरा रही है .झारखण्ड देखो को डॉ अराधना कुमारी ने बताया की हमारे जीवन में ये मायने नहीं रखता है की हम कान्हा से हैं बल्कि ये मायने रखता है हम अपने जीवन में दूसरों के प्रति क्या करना हैं। इन्होने जानकारी देते हुए कहा की कोरोना वायरस जैसी महामारी में भी अहम् भूमिका निभाते हुए 100 से भी ज़्यादा लोगों की देख रेख किया और निरंतर उनकी सेवा जारी है .वंही 150 अनाथ और गरीब बच्चों का भी ध्यान रख रही है , उनकी जरूरतों की चीज़ें उपलब्ध कराती है, महिलाओं ,मानसिक तौर से कमजोर , बाल श्रम जैसे कई तरह की सेवाओं में अपनी अहम भूमिका निभाई है और निरंतर जारी है। आगे इन्होने कहा की किसानों और हमारे समाज के गरीबों को डिजिटल, उद्योग इंडिया में परिवर्तन करना उनका एक मूल उद्देश्य है . अभी इनका इसके ऊपर काम चालू है .और भी लोगों को साथ जुड़कर इस मिशन को कामयाब करने की उम्मीद रखती है।

समाज सेवा के साथ पढ़ाई और लेखनी में भी काफी रुचि है.इन्होने ने 5 किताब इंगलिश और हिंदी में भी में प्रकाशित किया है.इनकी प्रकाशित किताब में- मेरी ज़िन्दगी -जिजीविषा,ए स्टोरी ऑफ कोरोना वायरस पान्डमिक ,द अनमैरिड वाइफ एवं नवाजिश -उन तारो में एक सितारा शामिल है .साथ ही कई नेशनल और इंटरनेशनल पत्रिका में भी इनके जर्नल प्रकाशित किया है.तथा इनके कार्य के लिए इनको कई पत्रिकाओं में सम्मानित भी किया गया है। डॉ. अराधना का मानना है कोई भी काम बड़ा या छोटा नहीं होता है. हमें अपने विचारों से आमिर होना चाहिए और जीवन में हर काम संघर्षों से जुड़ी होती है,इसीलिए हमेशा जीत की कोशिश में हार को भी सम्मान करें .तभी हम अपनी लक्ष्य को कायम करने में कामयाब होंगे.

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