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कोई जनप्रतिनिधि निलंबित अथवा पार्टी से बाहर किये जाते हैं, तो भी उस पर 10वीं अनुसूची के कानून प्रभावी होंगे

रांची : झारखण्ड में झाविमो में पार्टी का भाजपा विलय का विरोध कर रहे दोनों विधायक (बंधू तिर्की और प्रदीप यादव ) अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के रास्ते पर कानूनी अड़चन पैदा कर सकते है़ं  इसको लेकर विधायक रणनीति बनाने में जुटे है़ं  .
झाविमो विधायक बंधू तिर्की और प्रदीप यादव ने इसके लिए प्लॉट तैयार करना शुरू कर दिया है़ .राज्यसभा सांसद अमर सिंह के सपा से निष्कासन के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया जा रहा है़ . सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आदेश देते हुए कहा कि कोई जनप्रतिनिधि निलंबित अथवा पार्टी से बाहर किये जाते हैं, तो भी उस पर 10वीं अनुसूची के कानून प्रभावी होंगे.
वह उस पार्टी से भले ही विमुक्त हो लेकिन अपने मूल पार्टी से ही जुड़े होंगे़.  कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि किसी जनप्रतिनिधि को दल से निष्कासित किया जाता है, तो वह उनके दल का मामला है़  ,यह उस जनप्रतिनिधि और उनकी पार्टी का अंदरुनी मामला होगा.

लेकिन 10वीं अनुसूची का मामला अलग है़  यह सदन के अंदर मान्य ही होगा़  इस आदेश के अनुसार निलंबित या निष्कासित जनप्रतिनिधि के बाद भी दूसरे दल में जाने के लिए 10वीं अनुसूची के तहत दो-तिहाई जीते हुए प्रतिनिधि का होना आवश्यक है़.  ऐसे में इस आदेश को आधार बना कर बाबूलाल मरांडी के अकेले भाजपा में जाने का रास्ता रोकेंगे़.इधर झाविमो सुप्रीमो ने विधायक बंधू तिर्की को पार्टी से निष्काषित कर दिया है .

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