
सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने जजमेंट में चंडीगढ़ एवं प्रयाग के डिग्री को वैध माना है
झारखंड सरकार द्वारा 2012 में प्रकाशित गजट में चंडीगढ़ एवं प्रयाग विश्वविद्यालय का नाम है अंकित
दुमका :झारखंड शिक्षा निदेशालय द्वारा झारखंड में नियुक्त किए गए संगीत शिक्षकों के प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद एवं प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़ की डिग्रियों को फर्जी बताना न्याय संगत नहीं है।
इस संबंध में दुमका के प्रमुख संगीत गुरु पंडित सुशील प्रसाद सिंह तथा युवा संगीत शिक्षक ऋतुराज कश्यप ने इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उक्त दोनों संस्थाओं की डिग्रियों के आधार पर सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों के विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में अनेकों लोग संगीत शिक्षक के रूप में कार्यरत थे और आज भी कार्यरत हैं।उक्त संस्थानों की डिग्रियों के आधार पर वर्षों से इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ एवं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय जैसे देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु नामांकन होता आ रहा है। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा उक्त संस्थाओंं की डिग्रियों को मान्यता प्राप्त है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी उक्त संस्था की डिग्री की वैधता पर न्याय संगत निर्णय दिया गया है। साथ ही 6 फरवरी 2012 के झारखंड सरकार द्वारा प्रकाशित गजट में भी उक्त दोनों संस्थाओं का नाम दर्ज है। इसलिए शिक्षा निदेशालय द्वारा उक्त संस्थाओं के डिग्री को फर्जी बताना कहीं से भी न्याय संगत नहीं है। हमलोग झारखंड सरकार से निवेदन करते है कि इस बिंदु पर सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए संगीत शिक्षकों को उचित न्याय देने की कृपा करें।









