
रांची :झारखंड में मंत्रिपरिषद में कांग्रेस को आधी सीटें मिलने से रहीं और अब इस संदर्भ में कोई नई बात नहीं होने की जानकारी भी मिल रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पूर्व में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी और सीनियर नेताओं से हुई बात के आधार पर ही पूरी टीम का स्वरूप तय होगा। इसके बाद संभावना है कि कांग्रेस पांच मंत्रियों के पद को स्वीकार कर ले और आगे की रणनीति पर काम शुरू करे। पार्टी बोर्ड-निगम पर अधिक ध्यान लगा रही है।
राज्य में करीब डेढ़ दर्जन बोर्ड और निगम हैं, जिसमें से झामुमो-कांग्रेस आधा-आधा बांटकर काम चला सकते हैं। कांग्रेस के नेता इसके लिए खेमेबंदी में लग गए हैं। झारखंड में मंत्री बनने के लिए रेस में शामिल कांग्रेस नेताओं ने अब दूसरे विकल्पों पर विचार करना शुरू कर दिया है। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण विकल्प हैं बोर्ड और निगमों की अध्यक्षता। इसके लिए लॉबिंग भी शुरू हो चुकी है।
इसके माध्यम से कांग्रेस कुछ विधायकों के साथ-साथ उन लोगों को भी मौका देगी, जिन्होंने चुनाव नहीं लड़कर पार्टी के निर्णय के अनुरूप काम किया था। अब ऐसे नेताओं को पुरस्कार का इंतजार है और यह पुरस्कार बोर्ड-निगम के रूप में मिल सकता है। कई ऐसे नेता हैं जिन्होंने पिछले चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद इस चुनाव में पार्टी हित में गठबंधन का साथ दिया।
ऐसे नेताओं के लिए भी पार्टी आलाकमान के पास प्रस्ताव पहुंचे हैं। इसमें प्रदेश कांग्रेस की भी महती भूमिका होगी। सूत्रों की मानें तो प्रदेश के पांच कार्यकारी अध्यक्षों में से एक-दो को बोर्ड व निगमों में जगह देने की तैयारी की जा रही है। ऐसे भी अध्यक्ष का पद रिक्त होना है, जिसके बाद टीम में बदलाव की भी पूरी संभावना है। यंहा बता दे की अभी कांग्रेस से रामेश्वर उरांव, आलमगीर आलम एवं राजद से सत्यानंद भोक्ता झारखण्ड के कैबिनेट मंत्री है .झामुमो से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन है .
कांग्रेस के विधायकों को बोर्ड-निगम में मिलेगी हिस्सेदारी








