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देवघर में नवनिर्मित एयरपोर्ट का नामकरण सिदो कान्हू के नाम से होना चाहिए-मंडल


(झारखण्ड देखो/प्रतिनिधि)

दुमका : देवघर में नवनिर्मित एयरपोर्ट के नामकरण को लेकर सियासत शुरू हो गयी है। एयरपोर्ट के नामकरण को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के एक ट्वीट के बाद सिदो कान्हू के वंशज ने सवाल उठाया है। संथाल हूल के महानायक सिदो कान्हू के वंशज मंडल मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि देवघर में नवनिर्मित एयरपोर्ट का नामकरण सिदो कान्हू के नाम से होना चाहिए। जिन वीर सपूतों ने जल, जंगल और जमीन एवं देश के लिए अपना बलिदान दिया, उन वीर सपूतों को सम्मान दिया जाना चाहिए। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बीते दिनों केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को एक पत्र लिखकर देवघर एयरपोर्ट का नाम ‘बाबा बैद्यनाथ’ एयरपोर्ट रखने का आग्रह किया था। सीएम ने इसे ट्वीट भी किया था। दुमका परिसदन में पत्रकारों से बात करते हुए मंडल मुर्मू ने कहा कि उन्हें बाबा बैद्यनाथ एयरपोर्ट के नामकरण पर आपत्ति नहीं है और ना ही वह इसका विरोध करते है लेकिन संथाल परगना में जिन अमर शहीदों ने देश की रक्षा के लिए ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ अपनी जान दे दी, उन अमर शहीदों के नाम से इस क्षेत्र में बने एयरपोर्ट का नामकरण कर सरकार को उचित सम्मान देना चाहिए। वह सम्मान देने की मांग करते है चूंकि वह खुद उस परिवार से जुड़े है। श्री मुर्मू ने कहा कि इस मुद्दे पर पूर्व में कई सामाजिक संगठन मुख्यमंत्री से आग्रह कर चुके है। कहा कि इस मुद्दे को लेकर बुधवार को संथाल परगना के दौरे पर पहुँच रहे मुख्यमंत्री से उनका एक प्रतिनिधिमंडल भी मिलेगा। अगर सरकार इसे गंभीरता से नहीं लेती है तो सामाजिक संगठनों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

प्रेस वार्ता के दौरान मंडल मुर्मू ने सिदो कान्हू के वंशज रामेश्वर मुर्मू और साहेबगंज की महिला थाना प्रभारी रूपा तिर्की की मौत का भी मामला उठाया और कहा कि इन दोनों मामलों में सरकार से सीबीआई जांच की मांग की गई थी लेकिन सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।कहा कि धनबाद में एक जज की मौत के बाद सीबीआई जांच शुरू हो जाती है लेकिन जिन वीर सपूतों ने बलिदान दिया उसके वंशज की मौत की सीबीआई जांच की मांग एक साल से होती रही लेकिन सरकार ने सिर्फ अनुशंसा कर खानापूर्ति कर ली। कहा कि हेमंत सरकार हर मंच से 1932 का खतियान लागू करने की बात कहती रही लेकिन अब तक राज्य में इसे लागू नहीं किया जा सका। 1996 का पेसा कानून भी धरातल पर लागू नही है। इन सभी मुद्दों को लेकर सामाजिक संगठनों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिलेगा। मौके पर रूपचंद मुर्मू, धर्मगुरु लशकर सोरेन, डॉ सुशील मरांडी, बालेश्वर हेंब्रम, चंद्रमोहन हांसदा, अमर मरांडी, सुभाष चंद्र सोरेन, मुकेश टुडू, राजेंद्र टुडू, बबलू टुडू आदि मौजूद थे।

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