
दुमका: झारखण्ड की पूर्व समाज कल्याण मंत्री डॉ लुईस मरांडी ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर दुमका के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा इस विपदा की घड़ी में जहां सभी राज्य की सरकारें रणनीति बनाकर यु़द्ध स्तर पर कोरोना से बचाव के अभियान में लगी हुई है वहीं झारखण्ड सरकार इससे लड़ने एवं रोकथाम की कोई ठोस योजना आज तक नहीं बना पाई। लाॅक डाउन केे 28 वें दिन ट्व्टिर पर चलने वाली इस सरकार के मुखिया के फेसबुक अकाउन्ट से एक हास्यासपद बयान आता है ’’ राज्य में क्वारंटाईन सेण्टर पर रूके लोगों तक हम स्वादिष्ट भोजन पहुॅचाने को प्रयासरत हैं, साथ में दीदी किचन का भी महिमा मंडन है जिसकी पोल स्वयं उन्हीं के सहयोगी मंत्री द्वारा खोली गयी है और इन योजनाओं में व्यापक भ्रष्टाचार का आरोप भी उनके द्वारा लगाया गया है, जो सर्वविदित है कि दीदियों को जरूरी सामग्री ही उपलब्ध नहीं करायी जा रही कि वो पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा सकें फलस्वरूप निम्न कोटी का खाना उन स्थानों पर परोसा जा रहा है और लाभुको की संख्यां में आकड़ों का खेल जारी है। सरकार के मुखिया का कोरोना से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गयी तैयारी पर इतने दिनों तक कोई बयान नहीं आना आश्चर्यजनक है, या यू कहें कि सरकार हिन्दपीढ़ी से बाहर कुछ सोच ही नहीं पा रही। रोजाना राज्य में बढ़ती संक्रमितों की संख्या आज 56 पार कर गयी है जो काफी चिन्ताजनक है ऐसे में केन्द्र सरकार द्वारा लाॅकडाउन अवधि में लोगो
के जीवन को सरलता प्रदान करने के लिए जितनी सुविधाए दी जानी थी लगातार दी जा रही है। केन्द्र सरकार के साथ-साथ राज्य की मुख्य विपक्षी दल भाजपा के कार्यकर्ताओं एवं अन्य समाजिक संस्थाओं के द्वारा मोदी आहार सहित, खाद्य सामग्री एवं अन्य जरूरत कर सामग्री का वितरण किया जा रहा है और जरूरतमंद
लोगो को इसका लाभ मिल भी रहा हैं। परन्तु अत्यन्त खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि राज्य सरकार अपनी योजनाओं में व्याप्त खामियों को दूर करने के बजाए इस विपदा की घड़ी में राजनीति करने से बाज नहीं आ रही। जहां संपुर्ण राज्य में सामाजिक समन्वय स्थापित कर इस संक्रमण काल में जरूरतमंदो तक सहायता पहुॅचाने का प्रयास जारी है वहीं दुमका जिले के लिए राज्य के मुखिया ने अलग ही कानून बना रखा है। मोदी आहार के लगभग 6000 पैकेट वितरण के बाद सरकार के मुखिया के इशारे पर इसे रोकने का फरमान जारी कर दिया गया, वहीं फेस मास्क की अनुपल्धता में मेरे द्वारा किये जा रहे गमछा वितरण को भी रोक दिया गया। बड़ी विडम्बना है कि इस संकट की घड़ी में भी हेमन्त सोरेन की इस ओछी राजनैतिक सोच के कारण आज मेरे साथ-साथ सेवा भाव से इस कार्य में लगे सभी समाजिक संगठनों को भी सेवा कार्य से वंचित कर दिया। खुद मुक्कमल राहत कार्य न चला पाने वाल राज्य के मुखिया का ऐसा बर्ताव क्यों? क्यों रोक रहे हैं मुख्यमंत्री भाजपा सहित समाजिक संगठनों को राहत कार्य चलाने से? आज भी क्षेत्र की जनता भारी संख्यां में आपकी सरकारी योजना के लाभ से वंचित है उनकी आंखें मददगार की आस में पथरा सी गयी, लोग अनाज के अभाव में भुख से बिलबिला रहे हैं। नहीं चाहते हुए भी उन्हें अपने बच्चों के लिए अनैतिक कदम (शिकारीपाड़ा की घटना) उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मैं मुख्यमंत्री से पुछना चाहती हूॅ कि क्या जिले के किसी विधानसभा में उपचुनाव की कोई तीथि चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित की गयी है? क्या जिले में आदर्श आचार संहिता लागू है? अगर नहीं तो ऐसी मानसिकता राज्य के मुखिया को शोभा नहीं देती। मुख्यमंत्री आप राज्य की दुसरी सर्वाेच्च कुर्सी पर विराजमान हैं निश्चित रूप से आपके कार्याें की लकीर लम्बी होनी चाहिए, परन्तु दुसरों की लकीर को मिटा कर नहीं बल्कि दुसरो की लकीर से लम्बी लकीर खींचकर।








