
दुमका (झारखण्ड): कूल्हे में अर्थराइटिस या चोट की वजह से लंबे समय से दर्द के कारण न चल पाने वालों को अब आपरेशन के लिए रांची जैसे बड़े शहरों का रूख नहीं करना होगा। अब झारखण्ड की उपराजधानी दुमका में कूल्हे की हड्डी का प्रत्यारोपण करा सकेंगे। दुमका के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जब किसी हादसे में घायल व्यक्ति का न्यू केयर अस्पताल में कूल्हे की हड्डी का सफल प्रत्यारोपण किया गया। भारत सरकार की आयुष्मान योजना के अनुसार के उसका ऑपरेशन किया गया। अस्पताल के प्रमुख डॉ. तुषार ज्योति की मौजूदगी में रांची मेदांता के डाक्टरों ने ढाई घंटे के अंदर ऑपरेशन कर 24 घंटे के अंदर मरीज को चला दिया।मंगलवार को हॉस्पिटल के प्रमुख हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर तुषार ज्योति ने बताया कि दुमका के नयापाड़ा निवासी मनोज कापरी मार्च माह में सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। चोट लगने की वजह से उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई। मई माह में उनका आपरेशन कर गोला को बदला गया लेकिन इसके बाद भी मरीज को दर्द से निजात नहीं मिली। छह सितंबर को ढाई घंटे तक चले आपरेशन के बाद उनके कूल्हे की हड्डी को ही बदल दिया गया। अमूमन कूल्हा एक सॉकेट के साथ काम करता है। लोग आधा आपरेशन कराकर गोला को बदल देते हैं। लेकिन इस व्यक्ति की कूल्हे की हड्डी और उससे जुड़ा सॉकेट खराब हो गया था। ऑपरेशन कर कूल्हे और सॉकेट दोनों को बदल दिया गया। ऑपरेशन के 24 घंटे बाद ही मरीज चलने लगा। रांची के अलावा संताल परगना में इस तरह का प्रत्यारोपण नहीं होता है। पहली बार हुआ प्रयोग सफल रहा। ऑपरेशन में रांची मेदांता के डॉक्टर उज्जवल सिन्हा, निश्चेतक डॉक्टर समीर, डॉ रमेश कुमार व फिजियोथैरेपिस्ट डॉ विपुल कुमार मंडल की टीम ने सहयोग किया। ऐसे कई विगत वर्षों से यहां पर दूरबीन द्वारा नसों का इलाज किया जाता रहा है। डॉ तुषार ने बताया कि हॉस्पिटल में आठ माह से दूरबीन से नसों का इलाज किया जा रहा है। अगले वर्ष से सभी बीमारियों का इलाज ज्योति हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. तुषार ने बताया कि न्यूकेयर को एक सुपर अस्पताल बनाने की तैयारी चल रही है। अगले साल से यहां पर किडनी, गायनों के अलावा अन्य कई तरह की बीमारियों के इलाज की सुविधा मिलने लगी। लोगों को अब किसी भी तरह की बीमारी के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी।








