बकखाली – एक नया ठिकाना समुद्र प्रेमियों के लिए

छुट्टियों के मौसम में मन अचानक की यायावर हो उठता है। झारखण्ड की धरती एक घूमंतू को सब कुछ पेश कर सकती है सिवाय समुद्र के। हालाँकि हमारे प्रदेश में मनोरम पहाड़, निर्झर झरने, विशाल वन, सुन्दर घाटियाँ सब कुछ है, लेकिन अगर आपका मन समुद्र के मचल रहा है तो आपको झारखण्ड की सीमा को लांघना पड़ेगा। एक आम झारखंडी के लिए समुद्र का अक्सर ठिकाना दीघा या पूरी होता है। लेकिन हम आपको एक नए ठिकाने की ओर ले चलते है। कोलकाता और उसके आस-पास रहने वाले बकखाली को भली-भांति जानते होंगे या एक बार तो जरूर गये होंगे। बकखाली सुन्दरवन डेल्टा का एक छोटा-सा हिस्सा है जो पश्चिम बंगाल के 24-परगना जिले में अवस्थित है। यह बहुत छोटे-छोटे द्वीपों से मिलकर बना है जो सुंदरवन का ही अंग है। बकखाली लोकप्रिय है यहाँ के समुद्र-तट के कारण जो तकरीबन 7 किमी तक फैला है। यह पैदल चलने के साथ-साथ साइकिल चलाने का भी आनंद लिया जा सकता है।



हालाँकि कोलकाता से बकखाली आप बस या ट्रेन दोनों के जरिये पहुँच सकते है। बकखाली से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन नामखाना है। नामखाना से फिर वैन या बस के जरिये बकखाली के समुद्रतट या होटल तक जा सकते है। अगर आपको ट्रेन और बस बदलना झंझट का काम लगता है तो आप पश्चिम बंगाल की सरकारी बस सेवा का इस्तेमाल कर सकते है। धर्मतल्ला के बस अड्डे से NH-117 होते हुए बस सीधे आपको बकखाली के समुद्र तट ले जाएगी अलिपुर चिड़ियाखाना, डायमंड हारबर, काकद्वीप, नामखाना होते हुए। नामखाना के फेरी घाट पर आपको थोड़ा विराम करना पड़ सकता है। असल में नामखाना और बकखाली अलग-अलग द्वीप है जिनको एक छोटी लेकिन गहरी खाड़ी अलग करती है। यह खाड़ी एक व्यस्त जलमार्ग है जिसपर भारत और बांग्लादेश के छोटे-बड़े नाव और फेरी गुजरते है। इसमें से कुछ-कुछ नावों की ऊंचाई इतनी ज्यादा होती है कि इस खाड़ी पर पुल बनाना प्रायोगिक नहीं है। इसलिए बस, ट्रक और अन्य वाहनों को एक खुली वेसल ढोकर इस किनारे से उस किनारे को ले जाती है। पहली बार सफ़र करने वालो के लिए यह एक रोमांचकार अनुभव है। खाड़ी पार करने के एक घन्टे के अन्दर आप बकखाली में होंगे।

बकखाली का मैन्ग्रोव
बकखाली का मैन्ग्रोव

बकखाली में ढेरों होटल, रिसोर्ट और लॉज है, जो यहाँ आनेवाले सैलानियों के सेवा में हमेशा उपलब्ध है। हाँ, समुद्र-तट के सामने वाले होटलों में भीड़ ज्यादा मिलती है। बकखाली का मौसम गर्म है। यहाँ आने का सबसे अच्छा समय नवम्बर से मार्च के बीच होता है, क्योंकि इस वक़्त गर्मी कम रहती है और भीड़ भी ज्यादा होती है। शाम के वक्त तट पर काफी चहल-पहल रहती है। बकखाली के समुद्र-तट से सूर्योदय और सूर्यास्त देखना दोनों ही समान मनोरम अनुभव देता है। यहाँ का समुद्र-तट काफ़ी शांत और फैला हुआ है। हमलोग तट के किनारे-किनारे काफी दूर तक चले आए। शाम की ठण्डी हवा, साफ़ आसमान, शांत वातावरण के बीच-बीच में आती लहरों की आवाज, इतना काफी है आपको एक अलग जगत में ले जाने के लिए। अगर आप अपनी व्यस्त और बोरियत भरी ज़िन्दगी से कुछ दिनों की छुट्टी लेना चाहते है तो यह एकदम आदर्श जगह है।

फ्रेसरगन्ज
फ्रेसरगन्ज

मोटर से चलनेवाला रिक्शा यहाँ यातायात का मुख्य साधन है जो आपको हेनरी आइलैंड, फ्रेसरगन्ज फ़िशिंग हारबर, फ्रेसरगन्ज समुद्रतट वगैरह की सैर कराएगी। अगर आप पहली बार आ रहे है तो कोई दिक्कत नहीं है, आपका रिक्शा ड्राईवर आपको पूरी सैर कराएगा। रिक्शा कस्बो और गांवों के अन्दर से ले चलती है, जिससे आपको सुंदरवन के गांव में रहने वाले लोगो की ज़िन्दगी को करीब से देखने का मौका मिलेगा। बस्तियों को पार करने के बाद आप पहुचेंगे हेनरी आइलैंड के इलाके में। यहाँ जाने के लिए ईंट की सड़क है जो काफी संकरी है। इन सड़कों पर भारी वाहनों का आना मना है। सिर्फ छोटी कार और सरकारी विभाग को छोड़कर, जो यहाँ रहनेवाले जीव-जंतुओं के लिए है। रिक्शा से जाने के दौरान तरह-तरह के पक्षी, सांप आसानी से देखे जा सकते है। हेनरी आइलैंड असल में पश्चिम बंगाल मत्स्य पालन विभाग का एक प्रोजेक्ट है जो लगभग 100 एकड़ में फैला है। इस प्रोजेक्ट में 52 छोटे-बड़े पोखर है जिनमे तरह-तरह के मछलियों का पालन होता है। आइलैंड के अन्दर भी यात्रियों के रहने के लिए सरकारी लॉज बने है। वाच-टावर (Watch-tower) के ऊपर से आस-पास में फैले मैन्ग्रोव के जंगल को देखना अद्भुत अनुभूति देता है। मैन्ग्रोव के वन से गुजरते हुए आप हेनरी आइलैंड के समुद्रतट तक जा सकते है। आइलैंड का तट निर्जन है, कुछ सैलानी ही इधर आते। यह इलाका अनगिनत पक्षियों का घर है। चांदनी रात में यहाँ के तालाबो में पानी पीते हिरनों को भी देखा जा सकता है।

हेनरी आइलैंड का निर्जन समुद्र तट
हेनरी आइलैंड का निर्जन समुद्र तट

हेनरी आइलैंड के बाद रिक्शा आपको फ्रेसरगन्ज ले जाएगी. यहाँ समुद्रतट और फ़िशिंग हारबर है। इस जगह को एक पर्यटन स्थान के रूप में ख्याति तब मिली जब बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर सर एंड्रू फ्रेसर यहाँ आए। उन्ही के नाम से इस जगह का नाम फ्रेसरगन्ज रखा गया. इस इलाके में पवन-चक्कियों की एक लम्बी कतार देखी जा सकती है। इन पवन-चक्कियों से इस छोटे से इलाके को बिजली मिलती है। फ्रेसरगन्ज का समुद्रतट बिल्कुल वीरान है। तट पर सिर्फ कुछ मछुवारे ही दिखेंगे. लेकिन फ़िशिंग हारबर में काफी चहल-पहल रहती है। बड़ी-बड़ी मछली पकड़ने वाले जहाज, नाव यहाँ आते है और यहाँ से समुद्र में जाते है। यहाँ से पर्यटक नौका भी चलती है जो लोगो को जम्बूद्वीप नामक पास के द्वीप की सैर कराती है। यह सैर ज़िन्दगी की कुछ बेहद रोमांचकार अनुभवों में एक है। जम्बूद्वीप एक निर्जन जंगल से भरा एक छोटा द्वीप है. पहले यहाँ लोग उतरते और जंगल के अन्दर भी जाते थे, लेकिन अब यहाँ किसी के उतरने और अन्दर जाने की मनाही है। हार्बर से समुद्र भ्रमण की नौकाएं चलती है जो जम्बू द्वीप के आस-पास चक्कर लगा कर वापस फ्रेसरगन्ज फेरी घाट ले आएगी।

बकखाली का समुद्र-तट काफी अप्रत्याशित है। ज्वार-भाटा के समय तट का पानी भी आगे पीछे होता है। इसलिए समुद्र में नहाने तभी जाए जब पानी तट के बिलकुल करीब हो। बकखाली के तट के बीच-बीच में फंसाव से भरी जगह है जिसपर जाने से बालू धंस सकती है और आप फंस सकते है। तट के ऐसे हिस्से में दूर तक ना जाये जहाँ लोग ना हो। कई स्वंयसेवी समूह पुलिस के साथ मिल कर लोगो को सतर्क करती है, ताकि आप सुरक्षित रहे। हमेशा उनके निर्देशों को सुने और माने। सावधानी से ही आप एक रोमांचकारी और सुखद भ्रमण का लुफ्त उठा सकते है. तो बैग पैक कीजिये और निकल पड़िए।

Post Author: Binod Mandal

A programmer by profession and a blogger by passion who turns into passionate photographer too, loves to travel and listening to Indian Ocean.

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