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जेएनसी बिल्डर ने किया बड़ा फर्जीवाड़ा, फ्लैट के नाम पर खरीददारों को लगाया चूना

जुलाई 14, नई दिल्ली (झारखण्ड देखो) : ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय में शुक्रवार को जेएनसी बिल्डर और उसके जेएनसी दा पार्क प्रोजेक्ट के खरीदारों की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। खरीददारों ने कहा कि बिल्डर ने गुपचुप तरीके से एस्क्रो अकाउंट से 50 लाख रुपये निकाल लिए हैं। इस मामले पर प्राधिकरण ने बिल्डर से मंगलवार तक पूरी कार्ययोजना मांगी है।

गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने वर्ष 2010 में सेक्टर-16सी में जेएनसी बिल्डर को 20 हजार वर्ग मीटर जमीन का आवंटन किया था। उसी वर्ष बिल्डर ने उस जमीन पर जेएनसी दा पार्क नाम से प्रोजेक्ट लांच किया और बुकिंग शुरू कर दी थी। बिल्डर के प्रोजेक्ट में 934 फ्लैट हैं। जिसमे से 412 फ्लैट बिल्डर अबतक बेच चुका है। बैठक में खरीदारों ने कहा कि बिल्डर ने वर्ष 2010 से 2012 के बीच सबसे अधिक फ्लैट बेचे थे। इन सभी को वर्ष 2014 तक कब्जा देने का वादा किया था लेकिन तीन साल बाद भी बिल्डर कब्जा नहीं दे सका है। अगले तीन साल भी कब्जा मिलने की उम्मीद नहीं है क्योंकि साइट पर केवल पिलर की खड़े हैं। निर्माण कार्य लंबे समय से बंद है। खरीदार कमल, राकेश और सतेन्द्र ने बताया कि सभी खरीदार 70 से 80 प्रतिशत भुगतान बिल्डर को कर चुके हैं। बैठक में खरीदारों ने आरोप लगाया है कि बिल्डर ने एस्क्रो अकाउंट खोला हुआ है। खरीदार उसी अकाउंट में पैसा जमा कर रहे हैं।

खरीदारों का आरोप है कि बिल्डर ने फरवरी 2015 में फर्जीवाड़ा कर एस्क्रो अकाउंट से 50 लाख रुपये निकाल लिए थे। जब खरीदारों को इसकी जानकारी लगी तो बिल्डर से पूछा गया लेकिन वह आज तक जवाब नहीं दे सका है। प्राधिकरण ने एस्क्रो अकाउंट से पैसे निकलने के मामलों को गंभीरता से लिया है और बिल्डर से लिखित में जवाब मांगा है। जिस पर बैठक में बिल्डर खरीदारों के सवालों का जवाब नहीं दे सका। प्राधिकरण अफसरों का कहना है कि बिल्डर तैयारी के साथ बैठक में नहीं पहुंचा। बिल्डर दिसंबर 2018 तक कब्जा देने का वादा कर रहा है। जिसे पूरा करने की कार्ययोजना बिल्डर के पास नहीं है। लगातार एक महीने से नोटिस भेज रहे हैं लेकिन बिल्डर ने एक का भी जवाब नहीं दिया है। इसी बिल्डर पर प्राधिकरण का 21 करोड़ रुपये बकाया है।

बिल्डर ने लगाए प्राधिकरण पर आरोप

बिल्डर ने प्रोजेक्ट पूरा नहीं करने का कारण प्राधिकरण को बताया। उसने कहा कि प्राधिकरण ने प्रोजेक्ट तक सड़क नहीं बनाई है जिसके कारण वह प्रोजेक्ट का काम पूरा नहीं कर सका। इस पर प्राधिकरण ने बिल्डर को तत्काल उसके सवाल का जवाब दिया और सड़क बनी होने का तथ्य भी दिखाया। इस पर बिल्डर के प्रतिनिधि की बोलती बंद हो गई।प्राधिकरण अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी जर्नादन ने बताया कि बिल्डर ने अपनी कार्ययोजना नहीं दी है। जिस पर अब आगे मंगलवार तक बिल्डर से कार्ययोजना मांगी गई है। जिसमें पिछले पांच साल की बैलेंस सीट, कितना पैसा आया, कितना खर्च हुआ, कितने फ्लैटों की बुकिंग होनी बाकी है, जैसे सवालों की सूचना देनी है।

उल्लेखनीय है कि जिला गाजियाबाद में जेएनसी के बैनर तले बन रहे हाउजिंग कॉम्प्लेक्स ग्रीनवुड प्रोजेक्ट वसुन्धरा सेक्टर तीन में भी फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। वसुंधरा निवासी कुणाल भगत ने इस संदर्भ में गाजियाबाद थाने में एफआईआर दर्ज कराया है।

उनका कहना है कि उन्होंने ग्रीनवुड प्रोजोक्ट वसुंधरा सेक्टर तीन में सी-906 फ्लैक बुक कराया था, जिसके लिए बिल्डर ने अप्रैल 2017 में एडवांस में 4 लाख पचास हजार रूपये लिए थे। इसी बीच कुणाल भगत को जानकारी मिली कि बिल्डर ने कई प्रोजोक्ट 2012 से ही रोक कर रखे हुए हैं।

बिल्डर ने इस दौरान 1 लाख पचास हजार रूपये काटकर तीन लाख का चेक कुणाल भगत को वापिस कर दिया। फर्जी बिल्डर से परेशान कुणाल फिलहाल गाजियाबाद पुलिस के एक्शन का इंतजार कर रहे हैं।

बड़ा सवाल ये है कि देश के अलग-अलग इलाकों में लुभावने विज्ञापनो के माध्यम से खरीददारों को आकर्षित करने वाले बिल्डर्स की धोखाधड़ी पर प्रशासन आखिर कब नकेल कस पाएगी।

यह स्टोरी झारखण्ड देखो के लिए नई दिल्ली से प्रिंस मुख़र्जी ने की है

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