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हूल के इतिहास को पुनर्लेखन की जरूरत है- राज्यपाल

दुमका: हूल दिवस के अवसर पर झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने दुमका के सिदो कान्हू मुर्मू विवि दिग्घी में अमर नायक सिदो- कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. इस अवसर पर वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हूल के इतिहास के पुनर्लेखन की जरूरत है. 1857 के विद्रोह से पहले हूल विद्रोह हुआ, लेकिन सिदो कान्हू के वीर दर्शन और कोल विद्रोह को इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला. हूल के अच्छे काम को इतिहास में छोटा स्थान दिया गया जबकि छोटे काम को अधिक लिखा गया.

राज्यपाल ने आगे कहा कि संताल हूल केवल संताल परगना में मन रहा है जबकि इसे पूरे राज्य में मनाया जाना चाहिए. पूरे देश में सिदो कान्हू के कृतित्व को सम्मान मिले. इसके लिए सरकार को जनता ने भी कभी नहीं कहा. उन्होंने कहा कि गांव-गांव में संताल हूल के अमर नायकों के वीर गाथा गाया जाना चाहिए. ताकि प्रेरणा से प्रेरित होकर बच्चे आगे बढ़ें…वीर बनें..नायक बने, समाज को नेतृत्व प्रदान करें…

उन्होंने कहा कि केवल डिग्री हासिल करने के लिए पढ़ाई न करें. पढ़ाई कर समाज की ओर देखें. समाज के प्रति सोचें. हर दायित्व सरकार ही पूरी नहीं कर सकती है. उत्तरदायित्व सबको निभाने की जरूरत है. वहां उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि बच्चे गर्व करें कि आपने सिदो कान्हू की मिट्टी में जन्म लिया है. बच्चे उनकी तरह वीर साहसी बने. समाज के लिए जीने का काम करें, अपने कर्म आचरण से देश-विदेश में पहचान बनाएं.

राज्यपाल ने कहा कि बच्चों को केवल सिलेबस के अनुसार शिक्षा नहीं मिलनी चाहिए, बल्कि उन्हें दक्ष-निपुण बनाने की हमें जरूरत है. विज्ञान और डिजिटल के इस युग मे दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है. संताल हूल के अमर नायक सिदो कान्हू के नाम से स्थापित यह विवि भी पीछे नहीं रहना चाहिए.

हूल दिवस के अवसर पर यहां राज्यपाल ने प्रशासनिक भवन-2, एसपी महिला कॉलेज में लाइब्रेरी और लैंग्वेज लैब का उदघाटन किया, साथ ही कैंटीन का शिलान्यास किया. उन्होंने कॉफी टेबल बुक का लोकार्पण भी किया. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि महिला बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री डॉ लुईस मरांडी व दुमका सांसद सुनील सोरेन के अलावा डीआईजी राजकुमार लकड़ा, डीडीसी वरुण रंजन, एसपी वाईएस रमेश ,एसडीओ राकेश कुमार आदि मौजूद थे.कुलपति प्रो मनोरंजन प्रसाद सिन्हा ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि  प्रति कुलपति डॉ हनुमान प्रसाद शर्मा ने किया.

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