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साहित्य ही समाज की जीवन्तता का सबूत है- उपायुक्त

साहित्य ही समाज की जीवन्तता का सबूत है। उक्त बातें आज सूचना भवन, दुमका में ‘‘बाहा’’ त्रैमासिक पत्रिका का लोकार्पण करते हुए दुमका के उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा ने कही। उपायुक्त ने कहा कि प्रत्येक युग का साहित्य उस युग के समाज और जीवन शैली का प्रतिबिम्ब है। जनजातीय समाज के द्वारा अपने मानकों को, अपने परिधानों को, अपने ही लोगों के द्वारा एक बड़े फलक पर विष्व समुदाय की भाषा में रखना एक विषिष्ट बात है। ‘‘बाहा’’ में यह विषिष्टिता परिलक्षित होती है। ‘‘बाहा’’ की प्रधान संपादक स्टेफी तेरेसा मुर्मू ने कहा कि यह पत्रिका जनजातीय समाज के गौरव, वैभव और विषिष्टता को पूरे विष्व समुदाय के समक्ष रखेगी। जनजातीय युवा अब करवट ले रहा है और पूरे विष्व के साथ एक धरातल पर खड़ा है। बाहा की तरह जनजातीय बहुरंगी विविधता को समेटे यह पत्रिका तकनीक और कथ्य की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।  विजय टुडू ने कहा कि संताली समाज की विषिष्टता को बखूबी रूपायित करती इस पत्रिका का पाठक वर्ग विषाल और व्यापक है। यह एक अह्म बात है। इस अवसर पर विद्यापति झा, अमरेन्द्र सुमन, सिंहासन कुमारी, अंजनी शरण, मनोज घोष, ने भी अपने विचार रखे। पत्रिका के फाउन्डर डोमन चन्द्र टुडू ने भी अपने विचार रखे। स्वागत सम्बोधन उप निदेषक जनसम्पर्क अजय नाथ झा तथा धन्यवाद ज्ञापन कार्यपालक दण्डाधिकारी, प्रीतिलता मुर्मू ने किया। कार्यक्रम का संचालन डा0 अंजुला मुर्मू ने किया।

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