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झाविमो का विलय होगा नई कार्यसमिति बनने के बाद


रांची :झारखण्ड में झारखण्ड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) में राजनीतिक सरगर्मी तेज है़. झारखण्ड के प्रथम मुख्यमंत्री व झाविमो के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी विदेश यात्रा से लौटने के बाद भाजपा में पार्टी के विलय की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते है़ं .जानकारी के अनुसार
झाविमो में नई कार्यसमिति का गठन होगा है़ . पांच जनवरी से झाविमो कार्यसमिति भंग है़ .नई कार्यसमिति ही विलय की प्रक्रिया को पूरी करेगी़ .  इस प्रस्ताव पर नये जिलाध्यक्षों से भी सहमति ली जायेगी़ पार्टी सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे है़ं.वह विलय की प्रक्रिया में कानूनी अड़चन को दूर करने का प्रयास करेंगे श्री मरांडी की कोशिश होगी कि पार्टी संविधान के अनुरूप विलय की प्रक्रिया पूरी हो़.  कार्यसमिति द्वारा विलय का प्रस्ताव भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भेज कर सूचना दी जायेगी़  भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की सहमति के बाद  चुनाव आयोग को इसकी सूचना दी जायेगी़   इधर मिली जानकारी के अनुसार श्री मरांडी को छोड़ बाकी दो विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की ने भाजपा में विलय को लेकर अब तक सहमति नहीं जतायी है. दोनों विधायकों ने अपना पत्ता नहीं खोला है़  हालांकि यह तय माना जा रहा है कि विलय की प्रक्रिया का पार्टी विधायक विरोध करेंगे़. यंहा बता दे की झाविमो में बाबूलाल मरांडी के निर्णय को लेकर रायशुमारी ली जा रही है़.पार्टी के वरिष्ठ नेताओं  और पूर्व जिलाध्यक्षों से लिखित सहमति ली जा रही है़.नेता पार्टी को लिख कर दे रहे हैं कि वह श्री मरांडी के साथ है़ं . 

नियम के अनुसार 10वीं अनुसूची के पैरा दो के उप पैरा-1 के मुताबिक सदन के किसी सदस्य के मूल राजनीतिक दल का विलय हुआ, तभी समझा जायेगा, जब संबंधित विधान दल के कम-से-कम दो तिहाई सदस्य ऐसे विलय के लिए सहमत हो गये है़ं. 

 
विधायक बंधु तिर्की ने कहा की बाबूलाल मरांडी के लौटने का इंतजार है़  वह आते हैं, उसके बाद देखा जायेगा कि क्या होगा़.अगर वह जाने का मन बना चुके हैं, तो मेरा उनसे आग्रह होगा कि नयी कार्यसमिति में मुझे नहीं रखा जाये़.  

यंहा बता दे की 16 जनवरी के बाद तेज होगी राजनीतिक गतिविधि, झाविमो के अंदरखाने की राजनीति गरमायी है .

बाबूलाल मरांडी को छोड़ पार्टी के दो विधायकों बंधु तिर्की व प्रदीप यादव ने साफ नहीं किया है अपना स्टैंड .

झाविमो सुप्रीमो बाबाबुलाल मरांडी की कोशिश होगी कि पार्टी संविधान के अनुरूप विलय की प्रक्रिया पूरी हो, ताकि कोई सवाल न उठे.

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