
दुमका: सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय के वरीय पदाधिकारी रांची में अपने निजी आवास में जमकर बैठे हुए हैं और यहां शिक्षकेत्तर कर्मी एवं पेंशनर पेंशन के लिए लालायित है। वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से एक पत्र जारी कर कहा गया है कि सभी पदाधिकारी एवं विभागाध्यक्ष मुख्यालय में ही बने रहेंगे एवं वरीय पदाधिकारी स्वयं रांची फरार हो गए हैं। पत्रों का स्वयं धज्जियां उड़ा रहे हैं। माना कि उनका वित्तीय शक्ति राजभवन द्वारा सीमित कर दी गई लेकिन और भी कई ऐसे महत्वपूर्ण कार्य हैं जो मुख्यालय में रहकर नियमित रूप से कर सकते हैं। उनके मुख्यालय में नहीं रहने के कारण ही शिक्षकों को वेतन, सेवानिवृत्त को पेंशन एवं सातवें वेतनमान का एरियर का भुगतान समय पर नहीं हो पा रहा है। अगर इसी तरह लॉकडाउन बढ़ते रहा और पदाधिकारी मुख्यालय आने में संकोच करते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब एक वरीय पदाधिकारी का फेयरवेल भी ई लर्निंग की तरह इ फेयरवेल हो जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि आंतरिक स्रोत से सातवें वेतन का एरियर का भुगतान को छोड़कर सुरक्षा गार्ड को भुगतान करने की बात चल रही है। विश्वविद्यालय के एक वरीय पदाधिकारी के विरुद्ध शिक्षकों में इतना गुस्सा है कि उनका पुतला दहन करना चाहते हैं, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से धारा 144 एवं लॉकडाउन की वजह से वे इस कार्यक्रम को मूर्त रूप नहीं दे पा रहे हैं। नाम नहीं छापने के शर्त पर कई शिक्षकों ने कहा की यदि जल्द ही वरीय पदाधिकारी मुख्यालय नहीं आए तो कॉलेज व विश्वविद्यालय खुलने के बाद आक्रोशित शिक्षकों द्वारा तालाबंदी भी की जा सकती है। यहां बता दें कि 9 मई को एक वरीय पदाधिकारी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, इसलिए अब यहां पर उतना मन लगाकर काम नहीं कर रहे हैं। जब विश्वविद्यालय के वरीय पदाधिकारी अपने मुख्यालय में नहीं है इस बात की जानकारी राजभवन को भी है तो निश्चित रूप से उन्हें इनके लापरवाह पदाधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाये ताकि भविष्य में वरीय अधिकारी इससे भयभीत हो सके। और इस वरीय पदाधिकारी के भय से भी शिक्षक मुक्त हो सके .इधर छात्र संघ के कई नेताओ ने भी विवि के वरीय पदाधिकारी के कार्यशैली पर कई सवाल उठाया है .








