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‘मोबाइल’ की व्यवहारिक उपयोगिता ने कर दी नई पीढ़ी को ‘म्यूट’

लेखक :डॉ विनोद कुमार शर्मा
असिस्टेंट प्रोफेसर
निदेशक
मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्र,
मनोविज्ञान विभाग,
एस पी कॉलेज, दुमका।

झारखण्ड देखो डेस्क :आज के दौर में मोबाइल का उपयोगिता सर्वाधिक देखी जा रही है। चाहे वो सरकारी ऑफिस, स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल, उद्योग, निजी संस्थान या प्रतिष्ठान में काम करने वाले मालिक या साहेब या पदाधिकारी , क्लर्क या चपरासी हो सभी को तत्काल सूचना प्रेषित करने की आवश्यकता होती है जिस नाते इसकी लोकप्रियता और भी हो जाती है। बल्कि यूँ कहे कि मोबाइल व्यवहार करना एक नित्य जीवन की आवश्यकता हो चली है। साथ ही इस बात से इन्कार भी नही किया जा सकता है कि इससे एक जगह से दूसरी जगह बैठे लोगों से पल में संवाद हो जाती है, कुशल क्षेम पूछ ली जाती है, चिंता, तनाव सब कम कर ली जाती है बल्कि डिजिटल इंडिया के अभियान को उतना ही सार्थक समर्थन मिलता है।
इसकी व्यवहारिक उपयोगिता रोजमर्रे की ऑनलाइन पेमेंट हो, कैसकेस की बात हो, बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई हो , ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस या वेबिनार हो, या ऑनलाइन प्रशासनिक वार्ता या आदेश सभी मे मोबाइल की भूमिका सराहनीय मानी जाती है।
आधुनिक विकास के दौड़ में समय की बचत एक आवश्यक पूँजी मानी जाती है जिस बात की सार्थकता मोबाइल के अत्यधिक व्यवहारिकता एवं उसकी सभी वर्गों में लोकप्रियता से सहज अंदाज़ा होती है।
मोबाइल की उपयोगिता इस बात से भी सबसे ज्यादा मानी जाती है जब यह असहायों का तकनीकि बैसाखी बनता है। शरीर से लाचार, आपातकालीन या विषम परिस्थितियों में सहयोग के तलाश की महत्वपूर्ण जरिया आज का मोबाइल ही है। अमुक नंबर पर डायल कर सहायता प्राप्त कर ली जाती है।
बदलते सामाजिक माहौल में देखा जाय तो आज चारो तरह असुरक्षा की स्थिति बनी है कारण जो कुछ भी हो हर घर मे पारिवारिक सुरक्षा को लेकर चिंता होती है। घर से बाहर गए परिवार के सदस्यों से वक़्त-पे-वक़्त हालचाल जानने का जरूरी व वैकल्पिक जरिया मोबाइल ही बनता है। खासकर के घर से बाहर पढ़ाई के लिए कॉलेज या दूर हॉस्टल या काम में निकली लड़कियों को उसके व्यक्तिगत सुरक्षा की चिंता उसके परिवारजनों आम रहती है। जिसकी सुरक्षित होने या परेशानी में पड़ने की खबर का सीधा संवाद का आधार ना केवल इस मोबाइल से मिलता है बल्कि मोबाइल लोकेशन की भी जानकारी प्राप्त होती है जिससे वक़्त रहते उन्हें मुसीबतों से बचाया भी जाता है।
इस तरह एक तरह जहाँ मोबाइल की व्यवहारिकता अपने मे कई अच्छाइयों को समेटे तकनीकी व विज्ञान के विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है तो वही दूसरी और मोबाइल का प्रयोग ने व्यक्तिगत जरूरतों की ओर भी बढ़ा दिया है।

दुनिया को कर लो मुट्ठी के तर्ज पर मोबाइल अब सभी आवश्यकताओं व इच्छाओं की पूर्ती का केंद्र बन गया है। अब लोगो को किसी से बोलकर बाजार से पसंदीदा समान मांगने की जरूरत नही होती बल्कि ऑनलाइन आर्डर के अमेज़न हो, फ्लिपकार्ट हो या अन्य डॉट कॉम लोग घर बैठे ही लाखो की खरीदारी कर लेते है। उसी तरह पढ़ाई हो, व्यापार हो, ज्योतिष हो, चिकित्सा उपाय हो, कैरियर कॉउंसलिंग हो, डिग्री- डिप्लोमा हो, ब्यूटिशियन का कोई कोर्स हो, सोशल मीडिया के फेसबुक , व्हाट्सएप आदि से जुड़ मन की बाते कहने का हो या दोस्त बनाने का , मोटिवेशनल स्पीच हो, मनोरंजन हो, आदि सभी बातों की पूर्ति व संतुष्टि इस मोबाइल के जरिये किसी-न-किसी प्रकार से हो जाती है। इतना ही नही मोबाइल के बल वो दुनिया की तमाम चीजो को जानने की हसरतें जगाने लगता है तो मन को संतुष्ट करने वाली वो तमाम इंटरनेट साइट्स भी उसकी जिज्ञासा को बढ़ा देता है। जहां वो अपनी इच्छाओं की पूर्ति में दुनिया से अलग म्यूट हो जाता है।
टीन एजर्स हो या युवा सभी ने जानकारी प्राप्त करने की चाहत में मोबाइल व्यवहार को ना केवल अपनी आवश्यकता व आदत को बढ़ाया बल्कि निर्भरता का दायरा भी बढ़ा दिया।
हर बात की हाजिर जवाब की प्यास ने लोगों को इतना अधिक मोबाइल के प्रति इतना अधिक आशक्त व दीवाना बना दिया कि लोग एकांत में बिना भूख प्यास की चिंता किये बैगेर घंटो मूक रहकर इंटरनेट व सोशल मीडिया से जुड़े रहते है। जो ना केवल उसके सेहद पर बुरा प्रभाव डाल रहा है बल्कि इन म्यूट युवाओं में कई तरह के मानसिक विकार व अपराध भावना को जन्म भी दे रहा है। सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग हो, साइबर बुल्लिंग हो, अश्लील कंटेंट या फ़ोटो पोस्टिंग या शेयरिंग हो सभी म्यूट भावना का विचलित व्यवहार है। इतना ही नही नियमित व पर्याप्त मात्रा में संवेगात्मक अभिव्यक्ति ना होने से लोगों में ना केवल विषादी लक्षणों की प्रगाढ़ता बढ़ती है बल्कि आक्रामता भी घर करती है। जिससे अप्रत्याशित घटनाएं, हत्या व आत्महत्या आम हो जाती है। जरूरत है ऐसे पीढ़ी को अनम्यूट कर स्वास्थ्य सामाजिक मुख्यधारा में जोड़ने की। ताकि उनके भावनाओं को समझते हुए समय पर सही मार्गदर्शन दिया जा सके और बर्बाद होते जिंदगी से उन्हें बचाया भी जा सके।

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