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क्या वंशवाद की जड़े मजबूत करेगा बेरमो और दुमका उपचुनाव ?    


झारखण्ड देखो डेस्क रांची: क्या झारखंड में होने वाले उपचुनाव में वंशवाद हावी रहेगा। क्या सचमुच दुमका और बेरमो सीट पर हेमंत सोरेन और राजेन्द्र सिंह के परिवार के सदस्य ही किस्मत आजमाएंगे?

राजनीतिक गलियारों में ये सवाल इसलिए हिलोरें मार रहे हैं, क्योंकि इन दोनों परिवार के सदस्यों के नाम ही बतौर महागठबंधन उम्मीदवार फिलहाल सामने आ रहे हैं। दुमका सीट के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के छोटे भाई बसंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन के नाम की चर्चा है, जबकि बेरमो से दिवगंत राजेन्द्र सिंह के बड़े पुत्र जयमंगल सिंह का नाम रेस में सबसे आगे है। जानकारी के अनुसार दोनों दलों की ओर से करीब-करीब दो नामों पर सहमति भी बन चुकी है, और उन्हें चुनाव की तैयारियों में जुट जाने को कहा भी गया है। हालांकि आधिकारिक रूप से इस मसले पर अभी कोई कुछ भी बोलने से बचता नजर आ रहा है।

दावेदारी पर क्या बोले जयमंगल ?

जयमंगल सिंह से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपनी उम्मीदवारी को लेकर ज्यादा कुछ नहीं कहा, लेकिन इतना जरुर साफ किया कि परिवार का ही कोई सदस्य चुनाव लड़ेगा। जयमंगल सिंह ने फोन पर बातचीत करते हुए कहा कि ये मां तय करेंगी कि कौन चुनाव लड़ेगा। यानी राजेन्द्र सिंह की पत्नी भी मैदान-ए-जंग में कूद सकती हैं, और उनका छोटा बेटा गौरव भी। हालांकि पिता के निधन के बाद बड़े बेटे जयमंगल सिंह की सक्रियता देखकर ये माना जा सकता है कि उनका अपने पिता की परंपरागत सीट बेरमो से चुनाव लड़ना करीब-करीब पक्का है। हालांकि उनके छोटे भाई गौरव सिंह की दावेदारी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्योंकि माना जा रहा है कि पिता की विरासत को लेकर अंदरखाने दोनों भाइयों में जिच भी है। शायद यही वजह है कि जयमंगल सिंह ने गेंद मां के पाले में डाल दी है। 

जयमंगल को पार्टी का साथ

प्रदेश कांग्रेस की ओर से फिलहाल किसी प्रत्याशी का नाम अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन कांग्रेस के प्रवक्ता आलोक दुबे ने इतना जरुर कहा कि बेरमो राजेन्द्र सिंह की परंपरागत सीट रही है लिहाजा उनके परिवार की दावेदारी सबसे आगे हैं। इशारों-इशारों में उन्होंने बड़े बेटे जयमंगल सिंह के नाम पर रजामंदी भी जाहिर की। हालांकि उन्होंने कहा कि किसी भी नाम का एलान वक्त पर आलाकमान के फैसले के बाद होगा। 

बसंत या कल्पना पर झामुमो का दांव ?

झामुमो ने फिलहाल बसंत सोरेन और कल्पना सोरेन की उम्मीदवारी को लेकर कुछ भी साफ नहीं किया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि वक्त आने पर ये तय होगा कि कौन चुनाव लड़ेगा। हालांकि इसमें इस बात का जरुर ख्याल रखा जाएगा कि उम्मीदवार जिताऊ होना चाहिए। 

बीजेपी-आजसू में होगा गठबंधन ?

बीजेपी की ओर से भी उम्मीदवार के नाम पर फिलहाल पत्ता नहीं खोला गया है। प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि उचित वक्त पर पार्टी फैसला लेगी कि किसे चुनाव लड़ाना है। आजसू से गठबंधन के सवाल पर प्रतुल शाहदेव ने कहा कि सुदेश महतो का राज्यसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के पक्ष में मतदान करना सुखद संकेत है और हमलोग चाहेंगे कि उपचुनाव में भी एनडीए मिलकर चुनाव लड़े। प्रतुल शाहदेव ने बेरमो और दुमका सीट पर महागठबंधन के तहत चुनाव लड़नेवाले संभावित उम्मीदवारों को लेकर कहा कि वहां शुरू से ही वंशवाद हावी है। आजसू प्रवक्ता देवशरण भगत से ये पूछे जाने पर कि उपचुनाव में उनकी पार्टी का क्या रूख रहेगा? देवशरण भगत ने फिलहाल कुछ भी बताने से इनकार किया। हां, उन्होंने इतना जरुर कहा कि उम्मीदवार के बारे में सभी लोग मिल-बैठकर तय करेंगे। 

उपचुनाव की तारीख तय नहीं

अंदरखाने दो सीटों पर होनेवाले उपचुनाव के लिए राजनीतिक दलों में उम्मीदवारों के नाम पर रस्साकशी जारी है। हकीकत ये है कि उपचुनाव की तारीख अबतक तय नहीं है। निर्वाचन आयोग ने कहा कि अभी कोई इंस्ट्रक्शन नहीं है कि चुनाव कब होगा। राज्य निर्वाचन आयोग के संयुक्त सचिव हीरालाल मंडल ने कहा कि चुनाव के लिए कोई नोटिफिकेशन होने पर ही कुछ कहा जा सकता है। 

6 जनवरी को हेमंत ने छोड़ी थी दुमका सीट

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले हेमंत सोरेन ने दुमका सीट छोड़ दी थी। वो दुमका के अलावा बरहेट सीट से भी चुनाव जीते थे। जिसके वजह से सीट वेकेंट होने के 6 महीने के अंदर चुनाव हो जाना चाहिए, लेकिन कोरोना महामारी को लेकर चुनाव टलता जा रहा है। जबकि 6 महीने का वक्त गुजर चुका है। 24 मई को राजेन्द्र सिंह के निधन के बाद से बेरमो सीट भी खाली है। माना जा रहा है कि अब निर्वाचन आयोग एक साथ दोनों सीटों पर चुनाव कराएगा। 

झारखण्ड में नतीजों से बदलेगा राजनीतिक समीकरण ?

इस उपचुनाव को हेमंत की प्रतिष्ठा और 6 महीने के कामकाज से भी जोड़कर देखा जा रहा है। दोनों सीटों पर जीत या हार उनके मौजूदा कार्यकाल का आकलन करेगा। एनडीए के पास इस उपचुनाव में खोने को कुछ नहीं है, लेकिन अगर उसके उम्मीदवार एक भी सीट झटकने में कामयाब रहते हैं तो, विपक्ष को हेमंत सरकार पर हमलावर होने का एक और माकूल मौका मिल जाएगा, बल्कि झारखंड का राजनीतिक समीकरण भी तेजी से बदल सकता है। 

विधानसभा में किस दल के कितने विधायक ?

सीटों के लिहाज से फिलहाल विधानसभा में झामुमो के 29, बीजेपी के 25+1, कांग्रेस के 15+2, आजसू के 2, राजद का 1, एनसीपी का 1, माले का 1 और 2 निर्दलीय विधायक हैं। यानी हिसाब-किताब बिठाया जाय तो, फिलहाल सरकार में शामिल गठबंधन के पास 47 विधायकों का समर्थन हासिल है। जबकि आजसू के 2 विधायक और निर्दलीय अमित यादव को जोड़ लें तो बीजेपी के पाले में 29 विधायक हैं। 

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