
झारखण्ड देखो डेस्क :भारतीय स्वतंत्रता संग्राम (1857-1947) में देश की जनजातियों का योगदान किसी से कम महत्वपूर्ण नहीं था पर अधिकांश जनजातियों के संघर्षो और स्वतंत्रता सेनानियों के राजनीतिक योगदानों का विवरण उपलब्ध नहीं है। भारत छोड़ो आन्दोलन (8 अगस्त) की 78वीं वर्षगांठ के अवसर पर संताल परगना प्रमंडल के प्राचीनतम मूल निवासी आदिम पहाड़िया जनजाति की ऐतिहासिक सभ्यता और संस्कृति के शोधकर्ता इतिहासकार डा. दिनेश नारायण वर्मा के अनुसार स्वतंत्रता आन्दोलन के विभिन्न चरणों में पहाड़ियों ने सक्रिय भूमिका निभाई पर इस जनजाति के स्वतंत्रता सेनानियों का जीवनवृत और उनके राजनीतिक संघर्षों की समीक्षात्मक विवेचना नहीं की गई।इस उपेक्षा से पहाड़िया जनजाति के अधिकांश स्वतंत्रता सेनानियों की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस जनजाति के अधिकांश स्वतंत्रता सेनानी विस्मृत हो चुके हैं। इतिहासकार वर्मा ने बताया कि प्रख्यात पहाड़िया सामाजिक कार्यकर्ता शिवलाल मांझी(पूर्व रेलवे के कर्मचारी,साहिबगंज) ने काफी प्रयास करके भारत छोड़ो आन्दोलन (1942-1943) का समर्थन करने और इसमें शामिल होने वाले पहाड़िया स्वतंत्रता सेनानियों की खोज की और उनका विवरण तैयार करने में सक्रिय हो गये और हेतु संताल परगना में विभिन्न पहाड़िया गांवों का परिभ्रमण किया। पर 12 अगस्त 1992 को मधुमेह की बीमारी से पीड़ित मांझी का निधन हो जाने से उनका कार्य अधूरा रह गया। उनकी पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई और उनके द्वारा संकलित सभी जानकारियां भी उपलभ्ध नही हो सकीं। काफी प्रयास करने के बाद स्व.मांझी द्वारा संकलित निम्नलिखित पहाड़ियों की जानकारी मिली जो भारत छोड़ों आन्दोलन के स्वतंत्रता सेनानी थे-

1.जामा सरदार पहाड़िया डांगापाड़ा सुन्दर पहाड़ी,गोड्डा
2.छोटा धरमा पहाड़िया ,, ,,
3.बुधन पहाड़िया ,, ,,
4.सोनिया पहाड़िया ,, ,,
5.हरिया पहाड़िया ,, ,,
6.महादेव पहाड़िया ,, ,,
7.विजय पहाडिया ,, ,,
8.उल्ला पहाड़िया ,, ,,
9.गान्दे पहाड़िया ,, ,,
10.राम पहाड़िया मालीपाड़ा ,,
11.सीता पहाड़िया ,, ,,
12.बीरू पहाड़िया ,, ,,
13.सीता पहाड़िया सिंगारसी अमड़ापाड़ा,पाकुड़
14.राम पहाड़िया ,, ,,
15.उला पहाड़िया पाकरीकुटा
16.छोटा उला पहाड़िया ,,
17.सामू पहाडिया कटहलडीह
18.धरमा पहाड़िया तेलोपाड़ा,बोकड़ाबांध,गेड्डा
19.छोटा धरमा पहाड़िया गोराडीह-चपरीभिटा (शहीद),बोकड़ाबांध,गेड्डा
20.कार्तिक पहाड़िया सिंदरीजोला (शहीद),बोकड़ाबांध,गेड्डा
21.डोमन माल पहाड़िया सिंगारसी(शहीद),अमड़ापाड़ा,पाकुड़
22.धरमा कुमार पहाड़िया तेलोपाड़ा,बोकड़ाबांध,गेड्डा
23.बड़ा धरमा पहाड़िया तेलोपाड़ा (शहीद),बोकड़ाबांध,गेड्डा
24.बड़ा मंगरू पहाड़िया नतुनडीह,मसलिया,दुमका
25.छोटा मंगरू पहाड़िया हरिपुर,मसलिया ,,
26.इन्द्रदेव माल पहाड़िया ,, ,,
27.महान सिंह पहाड़िया बुधुडीह,रानेश्वर, दुमका
28.मटरू पहाडिया गुवासोल,मसलिया, ..
29.किनु मांझी हरिपुर,मसलिया, ,,
30.दनु मांझी सिंहलीबोना पहाड़,मसलिया, ,,
31.नीम चाँद पहाड़िया गायबथान,जामा
32.लोधका पहाड़िया चापडीरढ़ाब,मसलिया,दुमका
33.बिरूवा पहाड़िन ,, ,, ,,
34.सोनुआ मांझी गोलपुर,
35.दीनू गृही बुधुडीह, रानेश्वर ,दुमका
36.लागू गृही ,, ,, ,,
37.अकलू मांझी ,, ,, ,,
38.सोनु मांझी तेरमा पहाड़ी,आसनबनी
39.तनु सिंह ,, ,,
40.जगु सिंह ,, ,,
41.केन्दुआ देहरी गोडरो,रामगढ़
42.जगुलिया पहाड़िया युबदाहा,मसलिया,दुमका

स्व.शिवलाल मांझी की अप्रकाशित रचना में वर्णित कथित पहाडिया स्वतंत्रता सेनानियों के सम्बन्ध में इतिहासकार वर्मा ने कहा कि कुछ सेनानियों को शहीद बताया गया गया है पर उनके सम्बन्ध में पूरी जानकारी नहीं दी गई है। मांझी ने बिरूवा पहाडिन (महिला स्वतंत्रता सेनानी) का महज उल्लेख किया है पर उनके सम्बन्ध में भी कोई अन्य जानकारी नहीं दी गई है। इन पहलुओं पर शोध किये जाने की आवश्यकता बताते हुए इतिहासकार वर्मा ने कहा कि के.के.दत्त, एन.एम. पी.श्रीवास्तव,पी.सी.रायचौधरी, जे.सी.झा, पी. एन.ओझा आदि इतिहासकारों की रचनाओं में पहाड़िया स्वतंत्रता सेनानियों की विवेचना नहीं है। नेशनल बायोग्राफिज में भी किसी पहाड़िया स्वतंत्रता सेनानी का वर्णन नहीं है। इतिहासकार वर्मा के अनुसार स्वतंत्रता सेनानी मोतीलाल केजरीवाल की रचना (42 की क्रांति में संथाल परगना) में गंगा सिंह पहाड़िया (देव पहाड़,बोरियो) बाबूसिंह पहाड़िया (देव पहाड़,बोरियो), कार्तिक गृही (सिंदरीजोला,गोड्डा),बड़ा धरमा पहाड़िया (तेलोपाड़ा,बोकड़ाबांध,गेड्डा),छोटा धरमा पहाड़िया (चपरीभिटा, बोकड़ाबांध, गोड्डा),जैमिनी पहाड़िया (पथरगामा),बादल माल पहाड़िया (पहाड़पुर,बोकड़ाबांध, गोड्डा), डोमन पहाड़िया(सिन्दरीजोला,बोकड़ाबांध,गोड्डा), विद्यार्थी सिंहाई माल पहाड़िया(जासूस),बबुआ सिंह पहाड़िया,भैंसा सिंह पहाड़िया आदि का उल्लेख है और कुछ पहाड़िया स्वतंत्रता सेनानियों को शहीद भी बताया गया है। इसके बावजूद स्व. शिवलाल मांझी द्वारा दिये गये सभी पहाड़िया स्वतंत्रता सेनानियों की जानकारी केजरीवाल की रचना में नहीं है। उन्होंने कह कि स्व.मांझी इतिहासकार नहीं थे पर अपने स्वयं के प्रयास उन्होंने पहाड़िया स्वतंत्रता सेनानियों कथित संकलन कर व्यापक पैमाने पर शोध कार्य करने के लिए मार्ग प्रशस्त कर दिया। इतिहासकार वर्मा ने कहा कि अपनी रचनाओं में उन्होंने भी इन पहाड़िया स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख किया पर इन स्वतंत्रता सेनानियों का जीवनवृत और उनकी राजनीतिक गतिविधियों का विस्तृत और प्रामाणिक विवरण हेतु व्यापक शोध कार्य आवश्यक है।









