
दुमका: भारत के प्रथम राष्ट्रपति देश रत्न डा. राजेन्द्र प्रसाद अपनी योग्यता और प्रतिभा के बल पर ही देश के सर्वोच्च पद पर चुने गये। शिक्षा के क्षेत्र में, राजनीति में, संविधान और कानून के निर्माण में उन्होंने अपनी विद्वता का अद्भूत परिचय दिया। कहते है कि महात्मा गाँधी के कारण और पंडित जवाहर लाल नेहरू के जिद के चलते पं. नेहरू को प्रथम प्रधान मंत्री बनाया गया अन्यथा भारत के प्रथम प्रधानमंत्राी के लिये डाॅ राजेन्द्र प्रसाद या वल्लभ भाई पटेल का ही नाम तय था। उक्त बाते डाॅ राजेन्द्र प्रसाद के बड़े पौत्र अरूणोदय प्रकाश ने देश रत्न डा. राजेन्द्र प्रसाद मोमोरियल एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट के प्रतिनिधि अरविन्द वर्मा से एक मुलाकात में कही। उन्होंने बताया कि जब उनके दादा डाॅ राजेन्द्र प्रसाद का देहान्त 28 फरवरी 1963 को सदाकत आश्रम, पटना में हुआ था तो उस समय सर्वपल्ली डाॅ राधा कृष्णन भारत के राष्ट्रप्रति थे। दादा के निधन की खबर सुनकर अत्येष्ठि में शामिल होने आ रहे डाॅ राधा कृष्णन को पंडित नेहरू ने पटना आने से रोकने का प्रयास किया था। मगर डाॅ राधा कृष्णन ने कहा इतने बड़े नेता और सहयोगी के निधन पर उनका अन्तिम दर्शन करने वह जरूर जाएंगे और उन्होने पटना आकर डाॅ राजेन्द्र प्रसाद को श्रद्धासुमन अर्पित किया। बाद में जब पंडित जवाहरलाल नेहरू पटना आये तो पत्रकारों ने उनसे जब पूछा वह डाॅ राजेन्द्र प्रसाद की मृत्यु की खबर सुनकर भी पटना क्यों नही आये तो उन्होनें जवाब दिया कि वह दूसरे काम में व्यस्त थे। अरूणोदय प्रकाश बताते है कि लौह पुरूष बल्लभ भाई पटेल के निधन पर भी यही हुआ। उस समय उनके दादा डाॅ राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रपति थे। सरदार पटेल के निधन की खबर सुनकर वे गुजरात जाने को तैयार हुये तो नेहरू ने उन्हें वहाँ नहीं जाने की सलाह दी। मगर वह नहीं माने और पटेल को श्रद्धासुमन अर्पित करने उनके घर पहुँचे गये। अरूणोदय प्रकाश ने कहा कि उनके परिवार के लोग अपने देश के लिये हमेशा त्याग करते रहे है। वह बताते है कि उनकी माँ दो बहन थी। बड़ी बहन प्रभा देवी का विवाह लोक नायक जय प्रकाश नारायण के साथ हुआ था। जब इन्दरा गाँधी की सरकार ने देश में आपातकाल लगाया तो पूरी दुनिया जानती है कि उनके मौसा लोक नायक जय प्रकाश नारायण ने आपात काल का विरोध किया, सभी विपक्षी नेताओं को एकजुट कर काॅग्रेस पार्टी के विकल्प के रूप में जनता दल का गठन किया और देश में गैर काॅग्रेसी सरकार का गठन कराया। उन्होंने अफसोस जताया कि उनके पूर्वजों को जो सम्मान मिलना चाहिये वह सम्मान उन्हें यहाँ नहीं मिल रहा है। वह कहते है कि महात्मा गाँधी के जन्मदिन को अहिंसा दिवस के रूप में, पं. नेहरू की जयन्ती बाल दिवस, सर्वपल्ली डा. राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है, उसी तरह उनके दादा डाॅ राजेन्द्र प्रसाद की जयन्ती को मेधा दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिये।









