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शिक्षा जगत पर नोवेल कोरोना वायरस का गहरा प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है -राज्यपाल

शिक्षण संस्थान बन्द होने के कारण विद्यार्थियों को परेषानी का सामना करना पड़ा

दुमका :(झारखण्ड) सिदो कान्हु मूर्मू विवि के स्थापना दिवस के अवसर पर झारखण्ड की राज्यपाल-सह-कुलाधिपति द्रोपती मुर्मू ने अपने ऑनलाइन अभिभाषण में कहा की सर्वप्रथम मैं सिदो कान्हु मूर्मू विष्वविद्यालय के स्थापना दिवस के अवसर पर विष्वविद्यालय परिवार से जुड़े सभी को बधाई। आज सम्पूर्ण विष्व नोवेल कोराना वायरस की चुनौती से प्रभावित है। इसका प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ा है।
शिक्षा जगत पर नोवेल कोरोना वायरस का गहरा प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। षिक्षण संस्थान बन्द होने के कारण विद्यार्थियों को परेषानी का सामना करना पड़ा। लेकिन कहा जाता है कि ‘‘आवष्यकता ही आविष्कार की जननी है।’’ इस परिप्रेक्ष्य में ऐसे विकट समय में हमारे षिक्षण संस्थानों ने ऑनलाइन क्लास के माध्यम से विद्यार्थियों को मार्गदर्षन देने का सार्थक कार्य किया। मैं समझती हूँ कि संताल परगना क्षेत्र में विद्यार्थियों के मध्य ऑनलाइन क्लास हेतु इंटरनेट की सर्वसुलभता स्पीड एक चुनौती रही है। विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष रूप से मार्गदर्षन न मिलने के कारण उनकी षिक्षा बाधित हुई। फिर भी मुझे आषा है कि गुरूजनों के मार्गदर्षन से वे अपनी मेधा की बदौलत पीछे नहीं रहेंगे और मंजिल को हासिल अवष्य करेंगे। आज बदलते दौर में तकनीक के माध्यम से आप सभी से जुड़ पाई हूँ।

आज इस विष्वविद्यालय के स्थापना दिवस जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में आप सभी के बीच इस तकनीक के माध्यम से सम्मिलित होकर अपार प्रसन्नता हो रही है। किसी भी विष्वविद्यालय या षिक्षण संस्थान का स्थापना दिवस उत्साह एवं उमंग का होने के साथ-साथ आत्म-अवलोकन, आत्म-निरीक्षण एवं आत्म-चिंतन का भी होता है कि हम स्थापना के उद्देष्यों को मूल रूप प्रदान करने की दिषा में कहाँ तक सफल हो पाये हैं? यदि किन्हीं क्षेत्रों में सफलता अर्जित नहीं कर पाये हैं, तो उनकी क्या-क्या कारण अथवा वजहें हैं? इस परिप्रेक्ष्य में चाहिए कि इन सब बिन्दुओं पर विचार करते हुए प्रगति की दिषा में तीव्र गति से आगे बढ़ें। सम्पूर्ण षिक्षा जगत के लिए यह अत्यंत आवष्यक है। विवि या षिक्षण संस्थान की स्थापना के पीछे मूल उद्देष्य छात्रहित है। हमें अपने विद्यार्थियों के प्रति सतत् चिन्तनषील रहना चाहिये। उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिये। हमारे विद्यार्थी सिर्फ एक विद्यार्थी तक सीमित नहीं है। वे देष के भविश्य हैं। वे हमारी अमूल्य मानव सम्पदा है जिस पर हमें गर्व है। ऐसे में विद्यार्थियों को सही दिषा देना, हमारे विष्वविद्यालय व षिक्षकों का कर्तव्य एवं परम धर्म है। महान स्वतंत्रता सेनानी सिदो एवं कान्हु के नाम पर जनजातीय बाहुल्य इस क्षेत्र में स्थापित इस विष्वविद्यालय से इस राज्य को असीम अपेक्षा है। इस परिप्रेक्ष्य में इस विष्वविद्यालय का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों को हर हाल में गुणवत्तायुक्त षिक्षा सुलभ कराने की दिषा में प्रतिबद्ध रहे। हमें षिक्षा जगत के क्षेत्र में ऐसे उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिये कि अधिकाधिक युवा उच्च षिक्षा ग्रहण करने हेतु प्रेरित होंगे तथा राज्य के बाहर के विद्यार्थी भी नामांकन लेने हेतु इच्छुक रहेंगे। आधुनिक वैष्विक परिदृष्य में उच्च षिक्षा की भूमिका में परिवर्तन आया है। यह न केवल व्यक्तिगत दृष्टिकोण से अहम हो गया है, बल्कि समाज एवं राष्ट्रहित में भी महत्वपूर्ण है।

वैष्वीकरण के इस युग में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। इसमें सभी को एक्ससेलेन्स प्राप्त करने की ओर सदैव तत्पर रहना होगा, षिक्षण संस्थानों से इस दिषा में पूर्ण अपेक्षा है। इस हेतु सभी को एक मिषन अथवा अभियान के रूप में कार्य करना होगा। वे चिंतन करें कि किस प्रकार विद्यार्थियों को बेहतर-से-बेहतर षिक्षा प्रदान कर एक षिक्षित नागरिक बनाया जा सके ताकि राष्ट्र निर्माण में अपना सकारात्मक योगदान दे सकें।आशा करती हूँ कि यह विष्वविद्यालय डा सोनाझरिया मिंज के नेतृत्व में प्रगति के पथ पर सतत् आगे बढ़ता रहेगा। सभी टीम वर्क की भावना से डा मिंज को सहयोग दें तथा समर्पित होकर षिक्षा जगत की दिषा में निरंतर आगे बढ़ते रहें, ताकि यह विष्वविद्यालय राज्य ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक अनुकरणीय विष्वविद्यालय के रूप में जाना जाय। राज्य पाल ने कहा की एक बार पुनः मैं आप सभी को विष्वविद्यालय की स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई देती हूँ तथा सभी के उज्ज्वल भविश्य की कामना करती हूँ। विवि के स्थापना दिवस पर विवि से सेवनिर्वित शिक्षक एवं कर्मचारी को शाल और मोमेंटो देकर कुलपति ने सम्मनित किया .

कार्यक्रम छात्र छात्रों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किया गया .
मोके पर कुलपति प्रो सोनाझारिया मिंज ,प्रतिकुलपति डॉ हनुमान शर्मा ,कुलसचिव डॉ डीएन सिंह सहित विवि के सारे पदाधिकारी एवं शिक्षक कर्मचारी मौजूद थे .कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ अंजुला मुर्मू ने किया .

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