रांची।
झारखण्ड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन भी सीएनटी – एसपीटी एक्ट संशोधन मामले पर हंगामे का दौर जारी रहा। विपक्ष के हंगामे को देखते हुए स्पीकर दिनेश उरांव को तीन बार हाउस स्थगित करना पड़ा। इस हंगामे के कारण मुख्यमंत्री प्रश्नकाल भी नहीं हो पाया।सोमवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई विपक्षी दल झारखण्ड मुक्ति मोर्चा(जेएमएम) और झारखण्ड विकास मोर्चा(जेवीएम) के सदस्यों ने दोनों एक्ट के संशोधन से संबंधित बिल के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। सभी वेल में चले आये। जिसके बाद स्पीकर को पहली बार दोपहर 12 बजे तक सदन स्थगित करना पड़ा। दोबारा 12.40 में सदन की कार्यवाही शुरू हुई, लेकिन फिर से हंगामे को देखते हुए दोपहर 2 बजे तक सदन स्थगित करना पड़ा। स्पीकर दिनेश उरांव ने इस दौरान हंगामा कर रहे सदस्यों से अपनी जगह पर बैठने को कहा लेकिन उनकी बात का असर नहीं हुआ। विपक्षी सदस्यों ने न केवल सरकार के खिलाफ नारेबाजी की बल्कि कागज के टुकड़े भी वेल में फाड़कर फेंके। हालांकि इसपर स्पीकर ने आपत्ति भी जताई लेकिन शोर शराबे के बीच उनकी बात किसी ने नहीं सुनी। बाद में स्पीकर ने सदन को आर्डर में रखने के मकसद से सभी दलों के विधायक दल नेताओं की एक बैठक भी की, लेकिन बावजूद इसके विपक्षी सदस्य शांत नही हुए। सदन के बाहर राज्य के संसदीय कार्य मंत्री सरयू राय ने कहा विपक्ष का यह बर्ताव सदन की मर्यादा के प्रतिकूल है। इस मामले में नेता प्रतिपक्ष को दायित्व होता है कि वो अपने सदस्यों को समझाएं। वहीं झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष और लोहरदगा से विधायक सुखदेव भगत ने कहा कि सरकार दोनों कानूनों के मामले में लोगों के बीच भ्रम फैला रही है। दरसल इन कानूनों में पहले से जमीन के दूसरे उपयोग को लेकर प्रावधान है फिर से इसमें उन्ही बातों को जोड़ना तार्किक नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी तरफ से सदन में एक प्राइवेट बिल पेश किया गया है। इसमें एक्ट के तहत आनेवाली जमीन की एवज में लोन की व्यवस्था की बात का जिक्र है। भगत ने कहा कि इस बिल में रैयत के लिए लोन रिपेमेंट के लिए 30 साल तक की व्यवस्था और लोकल थाना की बाध्यता समाप्त करने का जिक्र है।
सीएनटी – एसपीटी एक्ट को लेकर विपक्ष झुकने को तैयार नहीं ,विधानसभा सत्र के तीसरे दिन भी हंगामा








