झारखण्ड विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि बहुमत का धौंश दिखाकर सीएनटी व एसपीटी एक्ट में सरकार ने संशोधन किया है। सरकार को आयोग गठित कर आम लोगो के सुझाव पर ही सीएनटी व एसपीटी एक्ट में संशोधन हो सकता है। उन्होने कहा की राज्य की भाजपा सरकार ने पूंजीपतियों को प्रदेश की जमीन सीएनटी व एसपीटी एक्ट्स में संशोधन के लाने के पहले से ही देना शुरू कर दिया था। राज्य कैबिनेट द्वारा पारित संशोधन के बहुत पहले से ही यह प्रक्रिया शुरू कर दी गयी थी।मरांडी ने कहा की यह सब मुख्यमंत्री की कुछ कारपोरेट घरानों के कोलकाता और दिल्ली में हुई बैठकें के बाद ही शुरू हो चूका था, केबिनेट में संशोधन की बात तो बाद में आई है।संताल परगना के गोड्डा जिले में अडाणी सहित कुछ बड़े पूंजीपतियों को जमीन बिना ग्राम सभा से पूछे और बिना स्थानीय लोगों के सलाह के सरकार ने पहले आवंटित करना शुरू किया फिर बाद में एक्ट्स में संशोधन के लिए केबिनेट में लाया। उन्होंने कहा कि इस मामले में कुछ विपक्षी पार्टियाँ भी चुप रही जबकि उन्हें पता था कि सरकार ऐसा कर रही है।मरांडी में कहा उन्हें ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अपने कबिनेट मंत्रियों को भी इस बात की जानकारी नहीं दी कि वे क्या करने जा रहे हैं। एक्ट्स में बदलाव के बाद से खुद भाजपा के कई आदिवासी नेताओं ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। यहाँ तक कि सरकार में सहयोगी आजसू ने भी राज्यपाल को लिखकर दे दिया है कि वह सरकार के इस फैसले से इत्तेफाक नहीं रखती।बाबूलाल ने कहा कि अब जो राज्य में वातावरण बना है उसमें सरकार पूंजीपतियों को जबरन जमीन नहीं दिला पायेगी। उन्होंने तामिलनाडू के मुख्यमंत्री जयललिता के निधन पर कहा की जयललिता एक मजबूत लीडर रही है। देश की राजनीति को अपूर्ण क्षति हुई है। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। प्रेस वार्ता के बाद बाबूलाल मरांडी आदिवासी छात्रावास भी गये ओर वंहा के छात्रों से मिले। मौके पर जिलाध्यक्ष धमेन्द्र सिंह,परितोष सोरेन आदि मौजूद थे।
बहुमत का धौंश दिखाकर सीएनटी व एसपीटी एक्ट में रघुवर सरकार ने संशोधन किया -बाबूलाल मरांडी








