भारतीय प्राकृतिक इतिहास के संरक्षण पर केंद्रित राउंड टेबल डिस्कशन 16 जनवरी को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में साहिबगंज जिले के राजमहल, मुंडली स्थित मॉडल कॉलेज के प्राचार्य एवं भू-वैज्ञानिक डॉ. रणजीत कुमार सिंह को आमंत्रित किया गया है। आयोजन पैलियोन्टोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा किया जा रहा है और यह शिव नदार फाउंडेशन के तत्वावधान में संपन्न होगा।
सोसाइटी की सचिव डॉ. अंजू सक्सेना ने डॉ. सिंह से राजमहल पहाड़ी क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवाश्म (फॉसिल्स) के नमूने लाने का अनुरोध किया है, ताकि विशेषज्ञों के बीच उन पर विस्तृत चर्चा की जा सके।
डॉ. सिंह ने बताया कि इस चर्चा में देश-विदेश से आए फैकल्टी सदस्य, भू-वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञ और शोधकर्ता शामिल होंगे। कार्यक्रम के दौरान भू-विरासत, भू-ऐतिहासिक धरोहर और जीवाश्म संरक्षण पर महत्वपूर्ण सुझावों पर विचार-विमर्श होगा। उनका मानना है कि इससे संरक्षण प्रयासों को नई दिशा मिलने की संभावना है।
उन्होंने यह भी कहा कि राजमहल पहाड़ी क्षेत्र में पाए जाने वाले करोड़ों वर्ष पुराने क्रिटेशियस और जुरासिक काल के अवशेषों पर आधारित जियो-टूरिज्म, जियो-हेरिटेज और जियोलॉजी इवेंट्स के शोध को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, डायनासोर की मौजूदगी से जुड़े शोध की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
गुरुवार को डॉ. सिंह लखनऊ के लिए रवाना हो गए। उल्लेखनीय है कि वे वर्ष 2008 से राजमहल जीवाश्मों पर देश-विदेश के विभिन्न संस्थानों, भू-वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के साथ लगातार कार्य कर रहे हैं। साहिबगंज जिले में जीवाश्मों की पहचान, शोध सहयोग और संरक्षण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।








