बड़कागांव (झारखंड): निजी कोल कंपनी के लिए मंगलवार को स्थानीय फुटबॉल मैदान में आयोजित जनसुनवाई हिंसा की भेंट चढ़ गई। ग्रामीणों के दो गुटों के बीच झड़प के बाद पंडाल में अफरातफरी मच गई और कार्यक्रम बाधित हो गया। यह जनसुनवाई झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से आयोजित की गई थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विरोध कर रहे ग्रामीण बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों पर सवार होकर पहुंचे और भाला, तीर, हसुआ जैसे पारंपरिक हथियारों से लैस थे। अधिकांश उपद्रवी मास्क, मफलर और हेलमेट पहनकर आए थे। आरोप है कि उन्होंने पूर्व नियोजित तरीके से पंडाल में घुसकर उपस्थित लोगों पर हमला किया।
हिंसा के दौरान महिलाओं को भी निशाना बनाया गया, जिससे पूरे परिसर में चीख‑पुकार मच गई। पंडाल में सैकड़ों कुर्सियां तोड़ी गईं और अन्य व्यवस्थाएं तहस‑नहस कर दी गईं। अनुमान है कि लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर कड़ी निंदा की और राज्य की कानून‑व्यवस्था पर सवाल उठाए। वहीं, स्थानीय विधायक रौशन लाल चौधरी और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध कोयला कारोबार, बालू तस्करी और अवैध चिमनी भट्ठों का संचालन होता रहा है। इन्हीं गतिविधियों से जुड़े तत्व विकास परियोजनाओं का विरोध करते हैं और बार‑बार हिंसक घटनाओं को अंजाम देकर शांति और कानून‑व्यवस्था को चुनौती देते हैं।








