दुमका: बेटियों की सुरक्षा और लिंगानुपात में सुधार के लिए जिला प्रशासन अब और भी सख्त रुख अपना रहा है। बुधवार को समाहरणालय में उपायुक्त (DC) अभिजीत सिन्हा की अध्यक्षता में PCPNDT एक्ट (गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम) के तहत गठित जिला सलाहकार और निरीक्षण समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई।
लापरवाह अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर गिरेगी गाज
बैठक के दौरान जिले के विभिन्न अल्ट्रासाउंड केंद्रों के नवीनीकरण (Renewal) के आवेदनों पर विस्तार से चर्चा की गई। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- निरीक्षण में मिली खामियाँ: जिला निरीक्षण दल ने हाल ही में कई केंद्रों का दौरा किया था, जहाँ संचालन में कई तकनीकी और कानूनी कमियाँ पाई गईं।
- सख्त कार्रवाई के निर्देश: उपायुक्त ने उन सभी केंद्रों को चिह्नित कर उनसे कारण बताओ नोटिस (स्पष्टीकरण) जारी करने का आदेश दिया है जहाँ अनियमितताएँ मिली हैं। संतोषजनक जवाब न मिलने पर इन केंद्रों के लाइसेंस पर संकट आ सकता है।
बैठक के मुख्य बिंदु
- रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल: नए केंद्रों के पंजीकरण और पुराने केंद्रों के नवीनीकरण के मानकों की समीक्षा की गई।
- नियमित मॉनिटरिंग: डीसी ने निर्देश दिया कि निरीक्षण दल समय-समय पर औचक छापेमारी करे ताकि भ्रूण लिंग परीक्षण जैसी कुरीतियों पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।
प्रशासनिक उपस्थिति
इस उच्च स्तरीय बैठक में स्वास्थ्य और सूचना विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें शामिल थे:
- सिविल सर्जन: डॉ. कमलेश्वर प्रसाद
- जिला RCH पदाधिकारी: डॉ. राम प्रसाद
- DPRO: रोहित कण्डुलना
- जिला कार्यक्रम प्रबंधक: राकेश आनंद
- अन्य अधिकारी: जिला डाटा प्रबंधक के.डी. सिंह और अस्पताल प्रबंधक सुदीप किस्कू।








