रांची:झारखंड की मौजूदा स्थिति पर तीखा हमला बोलते हुए पूर्व सांसद डॉ. सूरज मंडल ने कहा कि राज्य गठन के बाद पिछले 25 वर्षों में शिक्षा समेत हर क्षेत्र में हालात बेहद खराब हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों ने विशेष रूप से उच्च शिक्षा को गंभीर संकट में डाल दिया है।डॉ. मंडल ने यह बयान राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात के बाद दिया, जहां उन्होंने उच्च शिक्षा की स्थिति सुधारने को लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा। उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालयों में जल्द से जल्द स्थायी कुलपतियों की नियुक्ति की जाए और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।उन्होंने कहा कि झारखंड में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और तकनीकी शिक्षा संस्थानों की हालत बेहद दयनीय है और हर स्तर पर भ्रष्टाचार का बोलबाला है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उनके अनुसार, शिक्षा के मुद्दे पर “बाहरी-भीतरी” का विवाद खड़ा कर राजनीतिक स्वार्थ साधे जा रहे हैं, जिससे वास्तविक सुधार की कोशिशें प्रभावित हो रही हैं।
आरक्षण नीति पर भी डॉ. मंडल ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत से घटाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया, जबकि अनुसूचित जनजाति का आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया गया। इस फैसले के कारण पिछले 25 वर्षों में ओबीसी वर्ग को भारी नुकसान हुआ है और लाखों पदों पर उनकी नियुक्ति नहीं हो सकी।उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की नीतियां सामाजिक असंतुलन को बढ़ावा देती हैं और यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां मात्र 2 प्रतिशत आरक्षण में बदलाव के कारण बड़ा आंदोलन हुआ और सरकार को हटना पड़ा।डॉ. मंडल ने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड आंदोलन के नाम पर कई गैर-आंदोलनकारियों को गलत तरीके से आंदोलनकारी का दर्जा दिया गया है। उन्होंने आंदोलनकारी सूची की समीक्षा की मांग करते हुए राज्यपाल को एक सूची भी सौंपी और उसमें सुधार की अपील की।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि 3 मई को झारखंड विधानसभा के पुराने भवन में ओबीसी समुदाय के नेताओं की एक अहम बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आरक्षण में कटौती के प्रभावों पर चर्चा कर आगे की आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।
डॉ. मंडल ने अंत में कहा कि झारखंड में 20 साल तक आदिवासी मुख्यमंत्री और 5 साल तक बाहरी मुख्यमंत्री रहे, लेकिन उपलब्धियों के नाम पर राज्य को केवल निराशा ही हाथ लगी है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार जनहित में ठोस कदम उठाए, वरना जनता जवाब देने को तैयार है।
-डॉ सिकन्दर कुमार की रिपोर्ट








