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 ‘नारी वंदन अधिनियम’ को बताया ऐतिहासिक कदम

27 वर्षों का इंतजार खत्म, महिलाओं को मिलेगा सम्मान और राजनीतिक भागीदारी: ममता कुमारी

दुमका: भारतीय जनता पार्टी, दुमका द्वारा शनिवार को दुमका परिसदन में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व सदस्य ममता कुमारी ने “नारी वंदन अधिनियम” विषय पर विस्तारपूर्वक अपने विचार रखते हुए इसे देश की लोकतांत्रिक यात्रा का ऐतिहासिक क्षण बताया।अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का विषय पिछले 27 वर्षों से राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में लंबित था, जिसे नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व में भाजपा सरकार ने साकार कर इतिहास रच दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं को सम्मान, अधिकार और भागीदारी देने का सशक्त माध्यम है।उन्होंने इसके ऐतिहासिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 1996 में पहली बार महिला आरक्षण विधेयक संसद में प्रस्तुत किया गया था, लेकिन उस समय राजनीतिक अस्थिरता और विरोध के कारण यह पारित नहीं हो सका। इसके बाद 1998 से 2004 तक कई प्रयास हुए, किंतु हर बार यह अधूरा रह गया। वर्ष 2008 में इसे पुनः लाया गया और 2010 में राज्यसभा से पारित भी हुआ, लेकिन उस समय की कांग्रेस पार्टी सरकार इसे लोकसभा में पारित कराने में सफल नहीं हो सकी। 2010 से 2014 तक सत्ता में रहने के बावजूद इसे लागू नहीं किया गया।ममता कुमारी ने कहा कि वर्ष 2023 में भाजपा सरकार ने “नारी वंदन अधिनियम” के रूप में इस विधेयक को लोकसभा एवं राज्यसभा दोनों सदनों से पारित कराकर 27 वर्षों का इंतजार समाप्त किया। उन्होंने इसे महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर बताया।

उन्होंने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि स्वतंत्रता के बाद से संसद में महिलाओं की भागीदारी सीमित रही है। वर्ष 1952 में यह आंकड़ा मात्र 4.4% था, जो 2014 में लगभग 11.2% और 2019 में करीब 14.4% तक पहुंचा, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। इसके बावजूद 70 वर्षों में यह 15% तक नहीं पहुंच सका, जो इस अधिनियम की आवश्यकता को स्पष्ट करता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भी भारत महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के मामले में कई देशों से पीछे रहा है, जिसे यह कानून सुधारने का कार्य करेगा।

पंचायत स्तर के उदाहरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जहां-जहां महिलाओं को आरक्षण मिला है, वहां उन्होंने सफल नेतृत्व का परिचय दिया है। आज कई राज्यों में पंचायतों में 50% तक महिलाओं की भागीदारी है और लाखों महिलाएं सरपंच एवं मुखिया बनकर समाज का नेतृत्व कर रही हैं।केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना के माध्यम से करोड़ों गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है, “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान से समाज में जागरूकता बढ़ी है और मातृत्व वंदना योजना के जरिए माताओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि “नारी वंदन अधिनियम” इन सभी प्रयासों को राजनीतिक सशक्तिकरण से जोड़ता है।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने वर्षों तक इस विषय को केवल चुनावी मुद्दा बनाकर रखा, जबकि भाजपा ने इसे वास्तविकता में बदलकर महिलाओं को संवैधानिक अधिकार दिलाया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब 2010 में यह विधेयक पारित हो चुका था, तो उसे लागू क्यों नहीं किया गया।अपने संबोधन के अंत में ममता कुमारी ने कहा कि यह अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि नए भारत की नई राजनीति का आधार है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर उन्हें राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में लाया जा रहा है।प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा जिला अध्यक्ष रूपेश मंडल, जिला महामंत्री मृणाल मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष सोनी हेंब्रम, जिला मंत्री गायत्री जायसवाल, अनीता देवी, नीतू झा एवं नवल किस्कू सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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