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हिन्दू क्रांति सेना ने समाज कल्याण मंत्री पर ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करने का लगाया आरोप

झारखण्ड की समाज कल्याण मंत्री का होर्डिंग फंसा विवादों में
झारखण्ड की समाज कल्याण मंत्री का होर्डिंग फंसा विवादों में
झारखण्ड की समाज कल्याण मंत्री का होर्डिंग फंसा विवादों में

दुमका। उपराजधानी दुमका में  झारखण्ड  की समाज कल्याण मंत्री डॉ  लुईस मरांडी का शहर के विभिन्न स्थानों में लगाया गया होर्डिंग यहां विवादों में फंसता नजर आ  रहा है। होर्डिंग को लेकर कतिपय हिन्दूवादी संगठनो ने कड़ा ऐतराज जताया है। हिन्दू क्रांति सेना दुमका ईकाई ने  प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास एक ओर राज्य में धर्मांतरण विधयेक लागू कर रही है वहीं दूसरी ओर उनके सरकार में शामिल समाज कल्याण मंत्री ही ईसाई धर्म का प्रचार – प्रसार कर रही है। संगठन ने आरोप लगाया है कि भाजपा जिला ईकाई द्वारा शहर के प्रमुख चौक -चैराहों में होर्डिंग लगाया गया है जिसमें ईसा मसीह की तस्वीर के साथ तात्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी, मुख्यमंत्री रघुवर दास, समाज कल्याण मंत्री डा लुईस मरांडी , भाजपा के राष्टीय अध्यक्ष अमित शाह, झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा का तस्वीर है। इस होर्डिंग में नये वर्ष 2018 और आगामी 25 दिसम्बर के क्रिसमस की आमलोगों को बधाई दी गयी है। संगठन के प्रमंडलीय अध्यक्ष प्रकाश चन्द्र गंधर्व ने कहा है की इस होर्डिंग के जरिये समाज कल्याण मंत्री डॉ लुईस मरांडी सीधे तौर पर ईसाई धर्म का प्रचार -प्रसार करती दिख रही है। उन्होंनें कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री रघुवर दास संताल में आकर ईसाई धर्मावलंबियों को जबरन धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाते है वहीं दूसरी ओर उनके ही सहयोगी मंत्री यहां एक खास धर्म का प्रचार करती नजर आती है।  गंधर्व ने कहा कि भाजपा सुनियोजित तरीके से प्रदेश की जनता को बेवकूफ बनाकर ईसाई धर्म का प्रचार प्रसार कर रही है।अंग्रेजों की संस्था ईसाई मिशनरी के खिलाफ हमारे वीर सपूतों सिदो -कान्हु के अलावा जिन क्रांतिकारियों ने इनके शोषण से मुक्ति के लिये अपना बलिदान दिया है उनकी आत्मा इस संस्था को बढ़ावा देने वाले ताकतों को कभी माफ नहीं करेगी।

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One Comment

  • क्षुद्र मानसिकता का परिचायक है यह आरोप।
    मंत्री लुईस धर्मनिरपेक्ष हैं। बासुकीनाथ में पूजा इसका ज्वलंत उदाहरण है। दिपावली, छठ, ईद की शुभकामनाएं भी देती हैं।
    अनर्गल आरोप और विभाजन कारी विचारों को मान्यता नहीं दी जा सकती।
    लुईस जी का कार्य सराहनीय है।

    डा. धनंजय मिश्र

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